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कॉलेज की छत पर चढ़े छात्रनेता: उच्च शिक्षा मंत्री और कुलपति के खिलाफ लगाए नारे; इस मांग को लेकर किया हंगामा

Wed, 28 Feb 2024 07:46 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़

सार

पिथौरागढ़ महाविद्यालय कैंपस है या महाविद्यालय, इसकी स्थिति स्पष्ट करने की मांग को लेकर छात्रनेता मुख्य भवन की छत पर चढ़ गए। छात्रों ने छत पर चढ़कर उच्च शिक्षा मंत्री और एसएसजे के कुलपति के खिलाफ नारेबाजी की। 
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कॉलेज की छत पर चढ़े छात्रनेता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिथौरागढ़ महाविद्यालय कैंपस है या महाविद्यालय, इसकी स्थिति स्पष्ट करने की मांग को लेकर छात्रसंघ के पदाधिकारी मुख्य भवन की छत पर चढ़ गए। छात्रों ने छत पर चढ़कर उच्च शिक्षा मंत्री और एसएसजे के कुलपति के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि वे छात्र हितों के लिए लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। इसके बाद भी उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। कैंपस के निदेशक के मनाने के बाद छात्रसंघ पदाधिकारी करीब एक घंटे 22 मिनट के बाद छत से उतरे जिसके बाद सभी ने राहत की सांस ली।

बुधवार को छात्रसंघ अध्यक्ष कपिल चंद, महासचिव मुकेश कुमार, उपाध्यक्ष भूपेंद्र चलाल, संयुक्त सचिव नितेश उपरारी और कोषाध्यक्ष कबीर धामी दोपहर 12 बजे महाविद्यालय के मुख्य भवन की छत पर चढ़ गए। कैंपस और महाविद्यालय को इसकी सूचना लगी तो सभी के हाथ-पांव फूल गए। छात्रों ने यहां उच्च शिक्षा मंत्री और कुलपति के खिलाफ जोरदार नारे लगाकर प्रदर्शन कर आक्रोश जताया।

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उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ महाविद्यालय को परिसर बनाया गया है तो यहां जल्द मानकों के अनुसार प्राध्यापकों और अन्य पदों पर नियुक्ति करनी चाहिए। उन्होंने पिथौरागढ़ में एलएलबी, फाइन आर्ट्स, पीजी योग, बीएससी कंप्यूटर साइंस, एमए एजुकेशन, एमएड, मास कम्युनिकेशन और डिप्लोमा कोर्स शुरू करने की मांग भी उठाई। छात्र नेताओं ने कहा कि अगर उनकी मांगों को जल्द गंभीरता से नहीं लिया गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस बीच कैंपस निदेशक छात्र नेताओं को समझाकर नीचे उतारने के लिए मनाते रहे। आखिर 1:22 बजे छात्र नेता काफी मान-मनौव्वल के बाद छात्रनेता नीचे उतरे।

बोले छात्र-

ये प्रदर्शन सांकेतिक प्रदर्शन है, चेतावनी है। परिसर बनने के बाद हमें सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं लेकिन अनदेखी के कारण विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में है। यहां से प्राध्यापकों का लगातार स्थानांतरण हो रहा है लेकिन नए प्राध्यापकों की नियुक्ति नहीं की जा रही है। अगर आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन उग्र कर दिया जाएगा। - कपिल चंद, छात्रसंघ अध्यक्ष, पिथौरागढ़।

 

आगरा के बाद पिथौरागढ़ में महाविद्यालय खुला था। कैंपस में 82 पद रिक्त चल रहे हैं। यहां तैनात प्राध्यापकों के बच्चे बड़े-बड़े कॉलेजों में पढ़ते हैं। यहां कुछ प्राध्यापक दिनभर बैठे रहते हैं लेकिन कक्षाएं नहीं लेते हैं। सरकार, कुलपति और निदेशक के कारण पिथौरागढ़ महाविद्यालय बर्बाद हो रहा है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। - मुकेश कुमार, छात्र संघ महासचिव, पिथौरागढ़।

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बिना शासनादेश के कैंपस का गठन नहीं किया गया है। राज्यपाल की अधिसूचना के बाद कैंपस का गठन हुआ है। आंदोलनकारियों को समझा दिया है इसके बाद भी छात्रनेता नहीं मान रहे हैं। सिर्फ पिथौरागढ़ में ही शासनादेश की मांग की जा रही है। डिप्लोमा कोर्स शुरू करने के लिए भी प्रस्ताव बनाया गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी संचालन शुरू कर दिया जाएगा। - डॉ. हेम चंद्र पांडेय, निदेशक पिथौरागढ़ कैंपस।

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