करीब दो महीने बाद बृहस्पतिवार को यहां रसोईगैस के वाहन पहुंचे तो लोग दौड़ पड़े। दो वाहनों में 350 सिलेंडर यहां लाए गए थे, लेकिन करीब 750 उपभोक्ता सिलेंडर प्राप्त करने के लिए खड़े हो गए। लोग सिलेंडर प्राप्त करने के लिए ट्रक पर ही चढ़ने लगे।
गैस प्रभारी पीएस पोखरिया ने किसी तरह स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया। उन्होंने 400 लोगों को पर्ची दी और आश्वासन दिया कि सभी को शुक्रवार को रसोईगैस उपलब्ध करा दी जाएगी।
यहां पर रसोईगैस के लिए त्राहि त्राहि मची है। जाड़ों के सीजन में सिलेंडर नहीं मिलने से लोग भारी परेशानी में हैं। इस मुद्दे पर लोग आंदोलन भी कर चुके हैं। बृहस्पतिवार को सिलेंडर तो पहुंचे, लेकिन गैस एजेंसी के कर्मचारियों को लोगों की आवश्यकता का आभास नहीं हो पाया।
लोगों का कहना है कि यहां पर कम से कम 800 सिलेंडरों की तत्काल जरूरत है। तभी स्थिति सामान्य हो पाएगी। कहा गया कि कुछ को सिलेंडर मिलना और कुछ को वंचित करना गलत है।
गैस एजेंसी के अधिकारियों को यह व्यवस्था करनी चाहिए कि सभी को एक साथ सिलेंडर मिल जाए। अब लोग शुक्रवार तक इंतजार में हैं, यदि शुक्रवार को रसोईगैस का वितरण नहीं हुआ तो यहां जनाक्रोश फूट सकता है।