पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही औषधीय गुणों से भरपूर लेह लद्दाख के सी बकथॉर्न की सीमांत जिले के दारमा घाटी में भी खेती होगी। यह बेरी कई रोगों की रामबाण दवा है। इसकी झाड़ियां पर्यावरण में नाइट्रोजन गैस को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दारमा घाटी के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ हिमायली क्षेत्र में पर्यावरण को संतुलित करने के लिए वन विभाग वन पंचायतों में इसकी खेती करेगा। योजना में 1.31 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बेरी का जूस तैयार करने के लिए दारमा घाटी में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होगी। स्थानीय लोग इसे बेचकर स्वरोजगार से जुड़ेंगे। इसकी खेती से हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
यह भी जानें
-सी बकथॉर्न बेरी का माइनस 43 डिग्री तापमान पर हो सकता है उत्पादन
-विटामिन ए, बी, सी के अलावा ओमेगा ऑयल होता है मौजूद।
-सी बकथॉर्न का जूस कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में है कारगर।
-पोषक तत्वों का खजाना है और शुगर के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद है।
-एक लीटर जूस की कीमत 600 से 1200 रुपये है।
-सी बकथॉर्न बेरी से बढ़ती है याददाश्त।
-दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद है सी बकथॉर्न।
दारमा घाटी में सी बकथॉर्न बेरी की खेती से स्थानीय लोगों को स्वरोजगार मिलेगा। वन विभाग इसके उत्पाद बनाने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट भी बनाएगा। सी बकथॉर्न बेरी औषधीय गुणों से भरपूर है।
-आशुतोष सिंह, डीएफओ, पिथौरागढ़