पिथौरागढ़। रोडवेज डिपो का घाटा रोजाना बढ़ता जा रहा है। लंबी दूरी की बसों के संचालन के लिए देहरादून से कोई एसओपी जारी नहीं हुई हैं।
इससे बसों का संचालन हल्द्वानी, मझोला, टनकपुर, धारचूला तक ही किया जा रहा है। दिल्ली, देहरादून और बरेली आदि शहरों के लिए अभी बस सेवाएं बंद हैं।
कोविड कर्फ्यू में ढील के बाद बसों में सौ फीसदी यात्रियों के साथ संचालन शुरू कर दिया गया है, लेकिन अभी भी उत्तराखंड परिवहन निगम का पिथौरागढ़ डिपो को रोजाना 10 लाख रुपये का घाटा हो रहा है।
रोडवेज डिपो हल्द्वानी, मझोला, टनकपुर, धारचूला रूटों पर आठ बसों का संचालन कर रहा है। इन रूटों पर यात्रियों की संख्या ठीक है। इससे मात्र एक लाख रुपये की आय हो रही है।
इससे वाहनों के ईंधन का ही खर्च निकल पा रहा है लेकिन लंबी दूरी की बसें संचालित न होने से कुछ यात्री बसों या अन्य वाहनों से यात्रा कर रहे हैं।
टनकपुर, हल्द्वानी तक बसों से यात्रा कर रहे दिल्ली, देहरादून जाने वाले यात्रियों को वहां से दूसरी बसें बदलनीं पड़ रहीं हैं। सभी रूटों पर बसों का संचालन शुरू होने तक रोडवेज को घाटा उठाना पड़ेगा।
लंबी दूरी की बसों का नहीं हो रहा संचालन
पिथौरागढ़। कोरोना काल में 17 अप्रैल के बाद रोडवेज लगातार घाटे में चल रही है। दिल्ली, देहरादून, लखनऊ, बदायूं, बरेली, गुरुग्राम के लिए बसों का संचालन ठप है। 20 बसों के सापेक्ष मात्र आठ बसों का संचालन ही रोडवेज कर पा रहा है। लंबी दूरी की बसों का संचालन न होने से यात्री भी परेशान हैं।
आजकल डिपो को रोज 10 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। लंबी दूरी की बसों का संचालन शुरू न होने से अब रोज मात्र एक लाख रुपये की आय हो रही है। पहले कोविड कर्फ्यू में रोडवेज डिपो रोज 11 लाख रुपये के नुकसान में था। लंबी दूरी की बसों का संचालन शुरू होता तो राहत मिलती।
- आरके आर्या, एआरएम, रोडवेज डिपो, पिथौरागढ़।