पिथौरागढ़। पिछले दो दशकों में पिथौरागढ़ शहर का तेजी से विस्तार हुआ है। नगर पालिका और पालिका से बाहर के कस्बों और गांवों को मिलाकर शहर की एक लाख से अधिक की आबादी हो चुकी है लेकिन जितनी आबादी बढ़ी है उस लिहाज से सुविधाओं का कहीं भी विस्तार नहीं हुआ है।
पूर्व में नौ वर्ग किमी में फैले पालिका क्षेत्र में 15 वार्ड थे और कुल जनसंख्या 56044 थी। वर्ष 2017 में पालिका का विस्तार किया गया। आसपास के गांवों को पालिका में शामिल कर पांच नए वार्ड बनाए गए। इनमें धनौड़ा की जनसंख्या 1354, नेड़ा की 900, बस्ते की 947, ऐंचोली की 1788, दौला की 3460, सिकरानी की 250 की आबादी को नगर पालिका क्षेत्र में शामिल किया गया।
इसके बाद नगर पालिका का दायरा 12 वर्ग किमी और जनसंख्या 64743 हो गई है। पालिका का विस्तार करने के बाद वार्डों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। शहर से सटे 40 हजार से अधिक की आबादी वाले ऐसे कस्बे और गांव हैं जो शहर का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में शहर की आबादी एक लाख से अधिक हो चुकी है। दो दशकों में जिस तेजी से शहर का विस्तार हुआ और आबादी बढ़ी उस लिहाज से यहां सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं हुआ है।
शहर के आधे नगर पालिका क्षेत्र में सीवर लाइन नहीं बिछी है। सीवर लाइन न होने से सबसे बड़ा नुकसान परंपरागत जल स्रोतों को पहुंचा है। इन स्रोतों का पानी पीने योग्य नहीं है। तेजी से हो रहे शहर के फैलाव के साथ ही यातायात में भी बढ़ोतरी हुई है जबकि पार्किंग सुविधा पर्याप्त नहीं है। शहर में प्रतिदिन 20 हजार से अधिक वाहन संचालित होते हैं लेकिन पार्किंग के नाम पर केवल 250 वाहनों की क्षमता का बहुमंजिला पार्किंग स्थल बनाया गया है।
बाकी वाहन सड़कों में खड़े रहते हैं। पिथौरागढ़ शहर में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर दो अस्पताल हैं, जिनमें पूरे जिले की पांच लाख की आबादी के साथ ही पड़ोसी जिलों और पड़ोसी देश नेपाल के मरीजों का अतिरिक्त बोझ रहता है। बेस अस्पताल अभी संचालित नहीं हुआ है। नगर पालिका क्षेत्र में बैंक और डाकघर की सुविधा तो ठीक है लेकिन पासपोर्ट कार्यालय नहीं खुल पाया है।
ऐसे में लोगों को हल्द्वानी या देहरादून जाना पड़ता है। नगर पालिका क्षेत्र में जिन गांवों को शामिल किया गया था वह गांव अभी उचित पैदल रास्ते, पथप्रकाश व्यवस्था, पेयजल, बरसाती पानी की निकासी के लिए नाली निर्माण न होने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।