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पेयजल लाइन सुधारने गए युवक की खाई में गिरने से मौत

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सूजन सिंह(फाइल) - फोटो : PITHORAGARH
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गणाई गंगोली (पिथौरागढ़)। 15 दिनों से प्यासे पभ्या गांव के लोगों की प्यास बुझाने के लिए टूटी पाइप लाइन जोड़ने गए 36 वर्षीय युवक की खाई में गिरने से मृत्यु हो गई।
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गणाई गंगोली की ग्राम पंचायत पभ्या में एक पखवाड़े से पानी न आने से लोग परेशान हैं। रविवार को गांव के लोग खुद पेयजल लाइन में पानी जोड़ने मौके पर गए थे। पानी जोड़ते समय सूजन सिंह (36) पुत्र करम सिंह पैर फिसलने से 100 मीटर गहरी खाई में गिर गया। इससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
सूजन सिंह की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक छा गया है। सूजन मजदूरी करता था। उसके परिवार में पत्नी सहित छह साल और दो साल के मासूम बच्चे भी हैं।
सूजन की मौत के बाद परिजन सदमे में हैं। ग्रामीणों ने सूजन सिंह की मौत के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। कहा कि सूजन की मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। उन्होंने पीड़ित परिवार को पांच लाख की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
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मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा पभ्या
कुंदन मेहता
गणाई गंगोली (पिथौरागढ़)। पानी की लाइन सुधारने के दौरान पहाड़ी से गिरकर जान गंवाने वाले 36 वर्षीय सूजन सिंह का पभ्या गांव तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। गांव में सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। गांव के लोग आज भी वर्ष 1960 में बनी पेयजल योजना से प्यास बुझा रहे हैं। 10 किमी लंबी होने के कारण पेयजल लाइन आए दिन क्षतिग्रस्त होती रहती है, जिस कारण ग्रामीण परेशानी से जूझते हैं।
गणाई गंगोली तहसील के दूरस्थ गांव पभ्या के ग्रामीणों को आज भी पेयजल, स्वास्थ्य, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में हर रोज परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचने के लिए चार किमी खड़ी चढ़ाई नापनी पड़ती है। सर्वाधिक दिक्कतें गांव से गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाने में होती है।
पानी के लिए भी ग्रामीणों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पेयजल योजना के 10 किमी लंबा होने के कारण पेयजल योजना कई बार ध्वस्त हो जाती है। 1960 में बनी योजना की सिर्फ 1988 में मरम्मत की गई है। इस कारण गांव में 10 से 20 दिन तक पेयजल संकट गहरा जाता है।
ग्रामीणों को तीन किमी दूर दूलियाखेत पेयजल स्रोत तक पहुंचने के लिए तीन किमी की कठिन चढ़ाई पार कर स्रोत तक पहुंचना पड़ता है। क्षतिग्रस्त पेयजल योजना को ठीक करने के लिए सूजन की मौत से गुस्साएं ग्रामीणों का कहना है कि अगर योजना ठीक होती तो उनका सूजन आज जीवित होता।
अगर गांव के लिए पेयजल योजना ठीक होती तो गांव के होनहार युवक की खाई में गिरने से मौत नहीं होती है। आजादी के बाद से ग्रामीण तमाम तरह की दिक्कतें झेल रहे हैं। इसके बाद भी उनकी समस्या के समाधान को लेकर कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। - केशर सिंह डोबाल, ग्रामीण पभ्या गांव।
- केशर सिंह डोबाल, ग्रामीण पभ्या गांव।
सालों से गांव में पानी, सड़क और स्वास्थ्य की समस्या है। नेता और प्रशासन को ग्रामीणों की समस्या से कोई वास्ता नहीं है। पेयजल योजना को ठीक करने गए सूजन सिंह की मौत के लिए शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। सूजन सिंह के परिवार को आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
- बबीता डोबाल, सामाजिक कार्यकर्ता।
बोली विधायक-
सूजन सिंह मौत की खबर सुनकर बहुत आहत हूं। उनके परिवार को हरसंभव सहायता दी जाएगी। पभ्या गांव में पेयजल की व्यवस्था के लिए बसुकीनाग पेयजल योजना स्वीकृत हो गई है। 14 साल से लंबित भुनेड़ा-पभ्या सड़क को वन भूमि की सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। गांव के लिए जल्द सड़क और पानी पहुंचेगा। - मीना गंगोला, विधायक गंगोलीहाट।
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