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बदहाल सड़क और कोविड के कारण दारमा घाटी का प्रसिद्ध गबला मेला नहीं होगा

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दारमा घाटी में 1977 में आयोजित गबला मेले में नृत्य करती महिलाएं। (फाइल फोटो)संवाद - फोटो : PITHORAGARH
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धारचूला (पिथौरागढ़)। दारमा घाटी की बंद पड़ी सड़क 60 दिन बाद भी नहीं खुल सकी है। इस वजह से घाटी के 14 माइग्रेशन गांव का 1977 से चला आ रहा प्रसिद्ध गबला मेला टाल दिया गया है।
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हालांकि मेला टालने की एक वजह कोविड-19 को भी माना जा रहा है। उधर, दारमावासियों का कहना है कि दो महीने से सड़क बंद पड़ी है, लेकिन न तो प्रशासन को चिंता है न ही कार्यदायी संस्था इस ओर ध्यान दे रही है।
गबला मेला हर साल 18 से 21 अगस्त तक विश्व प्रसिद्ध दानवीरा जसुली शौकायनी के गांव दांतु व पंचाचूली की छांव में होता है। इस मेले में दारमा घाटी के 14 गांव के समेत अन्य घाटी के लोग भी प्रतिभाग करते हैं।
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स्व. डूंगर सिंह ढकरियाल, स्व. शेर सिंह दुग्ताल, स्व. नैन सिंह बोनाल और सुंदर सिंह बोनाल (85 उम्र) आदि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 1977 में इस गबला मेले की शुरुआत की थी।
बोनाल ने बताया मेले की शुरुआत का मुख्य उद्देश्य सीमांत की दुर्गम विषम परिस्थितियों में माइग्रेशन के समय गांवों के लोगों में भाईचारा कायम रखना, विकट समस्या आने पर एक दूसरे की मदद, समाज की उन्नति, महिला शिक्षा के प्रति जोर और चीन सीमा पर सुरक्षा कर्मियों का सहयोग करना है।
इसी मेले के बाद से ही दारमा घाटी में कई विकास कार्य हुए। महिला शिक्षा में लोगों के सहयोग के बाद सीमांत की महिला हर विभाग में पुरुषों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर देश-विदेश में सरकारी विभागों में अपनी सेवा देती आ रही हैं।
दारमा दीलिंग सेवा समिति महासचिव दिनेश चलाल ने बताया पिछले दो साल भी कोविड बीमारी के कारण ये मेला नहीं हो पाया था। इस साल बदहाल सड़क को देखते हुए समिति ने मेला नहीं करने का निर्णय लिया है। संवाद
मेला न होने से लोग निराश
धारचूला। गबला मेला नहीं होने से लोगों में निराशा है। स्थानीय फली दताल और नारायण तितियाल ने बताया इस वर्ष भी मेला नहीं होने से दुखी हैं। कई बार इस मेले की विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग भी किया है।
उन्होंने बताया कि तीन दिवसीय मेले में पहले दिन रात्रि में शिव पूजन, दूसरे दिन हया गबला देव की पूजा, तीसरे दिन सभी गांव के लोग पारंपरिक वेशभूषा में छोलिया नृत्य, विभिन्न प्रतियोगिता और रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
चौथे और अंतिम दिन समीक्षा बैठक के बाद मेले का समापन होता है। मगर हालात खराब होने के कारण मेला नहीं होने का मलाल है।
ऋषि मेले की तैयारी जोरों पर
धारचूला। व्यास घाटी में ऋषि मेले की तैयारी जोरों पर है। घाटी की सड़क खुली रहने से 22 अगस्त को रक्षाबंधन पर शुरू होने वाली व्यास ऋषि मेले की तैयारियां जोरों पर चल रही है। व्यास घाटी के लोगों ने गांव जाना भी शुरू कर दिया है।
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