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कबाड़ के ढेर से ढूंढ निकाली ज्ञान की ज्योति

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अड़किनी पुस्तकालय में पढ़ते बच्चे। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। आपकी मंशा अच्छी और किसी के लिए कुछ बेहतर करने का जज्बा हो तो रास्ता निकल ही आता है। सौन पट्टी क्षेत्र के अड़किनी गांव निवासी सुनील कोहली ने शिक्षा का उजियारा फैलाने की नियत से कबाड़ से 20 रुपये किलो की दर से किताबें खरीदकर गांव के युवाओं और बच्चों के लिए पुस्तकालय खोला है। वर्तमान में उन्होंने साहित्यकारों की मदद से पुस्तकालय में 1500 से अधिक किताबें जुटा ली हैं। पुस्तकालय का लाभ क्षेत्र के 15से अधिक गांवों के बच्चे और युवा उठा रहे हैं।
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25 वर्षीय सुनील बताते हैं कि कुछ वर्ष पूर्व उन्होंने नेहरू युवा केंद्र और खेल मंत्रालय भारत सरकार की ओर से इंटर्नशिप कार्यक्रम में हिस्सा लेकर 30 हजार रुपये का इनाम जीता था। इस राशि से उन्होंने गांव में पुस्तकालय खोलने का मन बनाया पर इतनी कम रकम से कुछ ही किताबें उपलब्ध हो पाईं। साहित्यकार डॉ. पीतांबर अवस्थी ने पुस्तकालय के लिए उन्हें 150 किताबें उपलब्ध कराईं। इसके बाद महेश पुनेठा सहित कई अन्य लोगों ने भी अपनी कोशिशों से किताबें दिलवाईं। पर्याप्त पैसे नहीं होने के कारण उन्होंने पिथौरागढ़ नगर में कबाड़ का काम करने वाले लोगों से संपर्क साधा और कबाड़ में मिलीं किताबों को 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदना शुरू किया। अब तक वो पुस्तकालय के लिए 1500 किताबें जमा कर चुके हैं।
जरूरतमंद बच्चों को दे रहे कोर्स की किताबें
सुनील बताते हैं कि वह जरूरतमंद बच्चों को स्कूली कोर्स की किताबें भी उपलब्ध करा रहे हैं। किताबें देते समय शर्त रखी जा रही है कि किताबों को नुकसान ना पहुंचाया जाए और अगली कक्षा में जाने पर किताबें वापस जमा कर दें। पुस्तकालय की मदद से तैयारी करने वाले चार बच्चे भारतीय सेना के लिए चयनित हो गए हैं।
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सामुदायिक भवन की मरम्मत कर शुरू किया पुस्तकालय
पिथौरागढ़। पिछले कई सालों से अड़किनी गांवों में बदहाल पड़े भवन में सुनील कोहली ने पुस्तकालय खोला है। उन्होंने खुद और लोगों की मदद से भवन में नए टिन डलवाए। अभी भवन के दूसरी ओर से पानी अंदर आ रहा है। सुनील का कहना है कि उनका पुस्तकालय को विस्तार करने का मन है, लेकिन सरकार शासन-प्रशासन की ओर से सहायता नहीं मिलने के कारण वह अभी तक उसका विस्तार नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि विधायक चंद्रा पंत ने सहयोग का आश्वासन दिया है।
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- सुनील की पहल सराहनीय है। मुझे उनके इस प्रयास की जानकारी मिली है। सुनील की इस नेक काम में मदद के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। -डॉ. आशीष चौहान, डीएम
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