बेड़ीनाग के गराऊं गांव के लिए बन रही मंडी परिषद की सड़क
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मंडी परिषद ने 2007 में यहां कठपतरिया से गराऊं गांव के लिए सात किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया था, लेकिन दस साल में यह सड़क पूरी नहीं हो पाई है। सड़क निर्माण से गांव जाने वाला पैदल रास्ता ध्वस्त हो गया और खेतों में मलबा भरने लग गया। गांव के लोग सड़क बनने की प्रतीक्षा करते रह गए। दस साल में करीब 25 परिवार गांव छोड़कर जा चुके हैं। गराऊं में अब सिर्फ 30 परिवार रह गए हैं।
मंडी परिषद की ओर से स्वीकृत इस सड़क की आधारशिला 2007 में तत्कालीन पंचायतीराज मंत्री विशन सिंह चुफाल ने रखी थी। आधारशिला रखते वक्त कहा गया था कि एक साल के भीतर गराऊं गांव तथा उससे सटे अन्य इलाके सड़क सुविधा से जुड़ जाएंगे। मंडी परिषद के अधिकारियों का कहना है कि सड़क का निर्माण तीन चरणों में किया जाना है। अभी पांच किलोमीटर रोड की कटिंग हो गई है। शेष दो किलोमीटर के लिए मंडी परिषद के पास धन की कमी है।
मंडी परिषद के जूनियर इंजीनियर वीके तिवारी का कहना है कि अब गांव के लोग सड़क को लोनिवि के अधीन कराने का प्रस्ताव बना चुके हैं। यदि सड़क को लोनिवि अपने हाथ में ले लेता है तो जल्दी काम पूरा हो जाएगा। गांव के लोगों को अब भी बेड़ीनाग आने के लिए सात किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ता है। गांव के लोगों का कहना है कि सड़क से कोई फायदा तो नहीं हुआ, उल्टा खेतों में मलबा भरने की समस्या बढ़ गई है।
सड़क के लिए अब उग्र आंदोलन होगा
गराऊं निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश पंत का कहना है कि गांव में सड़क नहीं होने के कारण लोग अब भी पैदल चलने को मजबूर हैं। सड़क को बनाए जाने की मांग गांव के लोग को कई बार मंडी परिषद और प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन इसमें कोई भी रुचि नहीं ली जा रही है। क्षेत्र की जनता अब सड़क के लिए उग्र आंदोलन का मन बना चुकी है।
बीमारों को अस्पताल लाने में दिक्कत
गराऊं निवासी जीवन चंद्र पंत ने बताया कि सड़क नहीं होने से बीमार लोगों को अस्पताल तक लाने में परेशानी होती है और बच्चों को पैदल चलकर स्कूल जाना होता है। गांव में पैदा होने वाले फल, सब्जी को भी बाजार नहीं ला सकते हैं। अगर सड़क बन जाए तो गांव में रोजगार के अवसर बढ़ जाते और पलायन को रोकने में मदद मिलती।