पिथौरागढ़। जड़ीबूटी शोध संस्थान ने उच्च हिमालयी क्षेत्र के दारमा वैली चागा मशरूम चाय को खोजा है। ये भोजपत्र के पेड़ों पर पाई जाती है। वर्तमान में रूस, सार्बिया सहित कई अन्य देशों से इसकी भारत में आपूर्ति की जाती है। इसमें कैंसर सहित कई अन्य रोगों से लड़ने की छमता होती है। स्थानीय लोग इसे स्याचिंग च्या के नाम से जानते हैं और इसका इस्तेमाल सर्दियों में चाय बनाकर शरीर को गर्म करने एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए करते हैं।
चागा मशरूम कवक की एक प्रजाति है जो मुख्य रूप से भोजपत्र के पेड़ों पर उगता है। इसका सर्वाधिक उत्पादन ठंडे प्रदेश नॉर्थ यूरोप, सर्बिया, अलस्का सहित कई अन्य देशों में होता है। इसका प्रयोग ठंडे इलाकों में रहने वाले लोग सर्द मौसम में शरीर को गर्म रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए करते हैं। जड़ीबूटी शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विजय प्रकाश भट्ट के नेतृत्व में अगस्त के अंतिम सप्ताह में दारमा वैली गई टीम ने समुद्र तल से 12 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित सौन गांव के भोजपत्र के जंगल में चागा मशरूम चाय ढूंढा। स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि इसका प्रयोग वे लंबे समय से चाय के रूप में कर रहे हैं। संवाद
कैंसर के इलाज के लिए फायदेमंद चागा मशरूम चाय
पिथौरागढ़। चागा मशरूम चाय का उपयोग पारंपरिक पूर्वी चिकित्सा में वर्षों से मुख्य पदार्थ के रूप में किया जाता रहा है। चागा देखने में भले ही ज्यादा अच्छा न लगे लेकिन स्वाद की बात करें तो यह आपको निराश नहीं करेगा। इसे तोड़कर चाय में मिलाया जाता है तो इसका स्वाद और भी अच्छा हो जाता है। चागा में फाइबर और आवश्यक पोषकतत्वों से भरपूर विटामिन डी, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम और भी बहुत कुछ होता है। एक शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में, चागा शरीर में मुक्त कणों से लड़ने के लिए जाना जाता है। शोधकर्ता बताते हैं कि यह कैंसर के इलाज के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। संवाद
ठंडे तापमान में उगता है चागा
पिथौरागढ़। चागा मशरूम स्वदेशी साइबेरियाई क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय है। यहां चागा हजारों वर्षों से भी अधिक समय से लोकप्रिय है। चागा शब्द पुराने रूसी शब्द ''''कजागा से आया है। जिसका अर्थ है मशरूम। यह 16-17वीं शताब्दी के आसपास था जब इस मशरूम के उपचारात्मक लाभों को मान्यता दी गई थी और यहां तक कि इसे औषधीय ग्रंथों में भी शामिल किया गया था। ईश्वर का उपहार या जड़ी-बूटियों का राजा कहे जाने वाले चागा का उपयोग सदियों से चीनी दवाओं में किया जाता रहा है संवाद
कोट
चाग मशरूम चाय को दारमा घाटी के सौन गांव के भोजपत्र के जंगलों में खोजा गया है। यहां इसका वैज्ञानिक विधि से अच्छा उत्पादन हो सकता है। इसके लिए सरकार को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इसके लिए सरकार को सबसे पहले भोजपत्र के जंगलों को बढ़ाने की आश्वयकता है। - डॉ. विजय प्रकाश भट्ट, सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक जड़ी बूटी शोध संस्थान।