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15 वर्षों से कीट पतंगों और चिड़ियों के संरक्षण में जुटे हैं जगदीश

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पिथौरागढ़ के धारचूला दारमा वैली में साइकिलिंग करते जगदीश। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। जगदीश भट्ट पिछले 15 सालों से प्रकृति को बेहद करीब से देख रहे हैं। जिले के साथ ही अन्य स्थानों में पाई जाने वाले पक्षी, तितली, कीट, पतंगों के बारे में जानकारी एकत्र कर उनके संरक्षण के लिए काम करते आ रहे हैं। साहसिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए वे साइकिलिंग, ट्रैकिंग, पर्वतारोहण के लिए स्थलों को नई खोज करते रहते हैं।
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जिले के विभिन्न पर्यटन स्थलों को बेहद करीब से जानना है तो जगदीश इसमें सबसे आगे हैं। पर्वतारोहण में जवाहर इंस्टिट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से बेसिक और एडवांस कोर्स करने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। छह हजार मीटर की तीन ऊंची चोटियों पर वे आरोहण कर चुके हैं।
इस दौरान उन्होंने प्रकृति के नजारों और जैव विविधता को बेहद करीब से देखा। इसके बाद जिले की जैव विविधता के संरक्षण करने के साथ ही लोगों का जागरूक करना और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति किसी तरह से जागरूक रहने के लिए काम किया।
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जगदीश का कहना है प्रकृति से हम हैं। इसे हमें समझना होगा। इसमें मिलने वाली जैव विविधता का महत्व अगर लोग समझने लगे तो हर तरफ पक्षियों की चहचहाट, तितलियों का उड़ना लोगों को सुकून देगा। उन्हें समझना होगा इनका संरक्षण पहले के मुकाबले आधुनिक दौर में जरूरी है।
तीन साल पूर्व उन्होंने विंग्स संस्था बनाकर लोगों को पर्यटन, प्रकृति, जैव विविधता और माउंटेन साइकिलिंग से जोड़ा। वे पांच हजार से अधिक लोगों को जैवविविधता के लिए जागरूक कर चुके हैं।
लेह तक की साइकिलिंग
पिथौरागढ़। जगदीश भट्ट ने जिले में साइकिलिंग को भी ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अधिक से अधिक युवाओं को इससे जुड़ा। वे मनाली, लेह, खारदुंगला, नीती वैली, धारचूला के दारमा, व्यास, चौदास और हिमाचल तक साइकिल से यात्रा कर चुके हैं। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करना और साइकिलिंग से किस तरह लोग स्वस्थ रह सकते हैं। साइकिलिंग का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के साथ ही प्रकृति से जोड़ना है।
पर्यटन स्थलों में स्वच्छता के लिए किया जागरूक
पिथौरागढ़। जगदीश ने बर्ड वॉचिंग से जिले में मिलने वाले पक्षियों की जानकारी ग्रामीणों से लेकर स्कूल के बच्चों तक पहुंचाई। कार्यशालाओं का आयोजन कर उन्हें पक्षियों का महत्व बताया। बटरफ्लाई, कीट और पतंगों पर शोध कार्य करते आ रहे हैं। प्रदेशभर में ट्रैकिंग कर उन्होंने लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया है।
जगदीश बताते कहते हैं पर्यटक स्थलों में आकर सुकून और थकान हर कोई मिटाना चाहत है लेकिन यहां पर आकर दूसरे के लिए गंदगी की छाप छोड़कर जाना हमारे लिए बड़ी भूल है। लोगों को समझना होगा प्रकृति से छेड़छाड़ हमारी लिए घातक साबित होती है। जब भीषण आपदा आती है। ऐसे में प्रकृति शुद्ध हवा और वातावरण देकर हमारा ख्याल रखती है। तो हमें भी उसके प्रति समर्पित भाव से कार्य कर उसे स्वच्छ रखना होगा।
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