पिथौरागढ़ (दीपक कापड़ी)। सीमांत जिले की 70 वन पंचायतों को माइक्रो प्लान के तहत विकसित किया जाएगा। इसके लिए वन पंचायतों का चयन कर लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य वन पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना है। वन विभाग ने जिले की 70 वन पंचायतों का चयन कर रिपोर्ट शासन को भेज दी है। शासन से स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
वन पंचायतों को आत्म निर्भर बनाने के उद्देश्य से जिले की 70 वन पंचायतों को माइक्रो प्लान के तहत विकसित करने की योजना है। इन वन पंचायतों को पांच साल तक विकसित किया जाएगा। जिसमें वनीकरण, आग से बचाव, भूमि और जल संरक्षण, नौले धारों का संरक्षण, जड़ी बूटी संरक्षण आदि कार्य किया जाएगा। इन वन पंचायतों की आय में सुधार करने के लिए लीसा, जड़ीबूटी, झूलाघास आदि के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कार्य किए जाएंगे। साथ ही सरपंचों को उनके अधिकारों की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। संवाद
ये वन पंचायतें होंगी विकसित
पुनला भटका, तातांगांव रौते, धारचूला, छलमा छिलासो, धारपांगू, रमतोली, पोस्तला, मैतोली, हलियाडोब, सुकल्याडी, क्वैराली, ऐराड़ी, पुरदम, बमनगांव खालसा, लोध, नाचनी, तल्ला भैंसकोट, रसियाबगड़, गिन्नी, सकुन, चिमतोली मल्ली, नैनीनयावाद, निशनी, सल्मोड़ा, फगाली, मझेड़ा, आगर, कांटे, बकरकटिया, मझेड़ा, गरूड़ा, देवदार, भुरमुनी, रावलगांव, सनकटिया, आगर, गुरना, पाटी पलचौरा, घुनसेरा गांव, भौड़ी, थरकोट, हिमतड़, गोडियागांव, मड, सल्ला, चलियागांव, नखनौली, क्षत्रीयगांव, मसमोली,चौखा, ओलीगैर, सिनखेला, अटलगांव, तल्ली भैसूड़ी, पत्थरकोट मल्ला, रानीखेत, घिमाली, अजेड़ा तकरारी, चामा, पत्थरकोट तल्ला, गटकुना, घनधूरा, खडियानी, बाजार, लुमती, सिरतोला, कैणी,खेतार कन्याल, कालिका, ग्वाल।
पिथौरागढ़ जिले की 70 वन पंचायतों को माइक्रो प्लान के तहत विकसित किया जाएगा। इसके लिए वन पंचायतों का चयन कर लिया गया। चयनित वन पंचायतों की आय में सुधार के लिए भी कार्य किए जाएंगे। - कोको रोसे, डीएफओ पिथौरागढ़।