राजकीय मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजिस्ट के बाद अब उप जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं, जिससे दोनों अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड बंद हो गए हैं। जिसके चलते मरीज और गर्भवती महिलाएं अल्ट्रासाउंड जांच के लिए निजी केंद्रों पर निर्भर हो गए हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज और उप जिला अस्पताल में 1-1 रेडियोलॉजिस्ट हैं। मेडिकल कॉलेज की रेडियोलॉजिस्ट कुछ दिन पूर्व कोरोना संक्रमित हो गई थी, जिसके बाद कॉलेज के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में अल्ट्रासाउंड जांचें बंद हो गई। बीते दिन उप जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई, जिसके बाद यहां अल्ट्रासाउंड कक्ष को बंद कर दिया गया। रेडियोलॉजिस्ट भी होम आइसोलेट हो गए।
दोनों अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जांचे बंद हो गई हैं। यदि राजकीय उप जिला अस्पताल की बात करें, तो यहां प्रतिदिन 20 से 25 अल्ट्रासाउंड जांचे होती हैं। इनमें 15 गर्भवती महिलाओं के केस होते हैं। सरकार की योजना के तहत गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड मुफ्त में होता है। जबकि अन्य केस की फीस 570 रुपये है। ऐसी स्थिति मेें मरीजों और गर्भवती महिलाओं को बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है, जिसके लिए 1200 से डेढ़ हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
उप जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने आई साक्षी और रागिनी ने बताया कि अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला देखकर लौट रही हैं। बाहर से परीक्षण करवाने में गुणवत्ता की गारंटी नहीं होती है। जब रेडियोलॉजिस्ट ठीक हो जाएंगे, तभी दोबारा आएंगे।
-कोरोना के लक्षण दिखाई देने पर मैंने सैंपल देने के बाद खुद को आइसोलेट किया हुआ है। अल्ट्रासाउंड कराने गर्भवती महिलाओं सहित गंभीर रोगी आते हैं। ऐसे में लापरवाही ठीक नहीं है। यदि बुखार या अन्य कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए, तो 3-4 दिन बाद काम पर लौट जाऊंगा। -डॉ. रचित गर्ग, रेडियोलॉजिस्ट उप जिला अस्पताल श्रीनगर