दो दिन तक राजकीय मेडिकल कॉलेज का गहन निरीक्षण करने के पश्चात एनएमसी (राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग) की टीम लौट गई। सूत्रों के अनुसार, एनएमसी की निरीक्षक कॉलेज के संसाधनों से संतुष्ट नजर आई लेकिन संकाय सदस्यों और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की कमी कॉलेज के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पूर्व में एमबीबीएस की 100 सीटें निर्धारित थीं। केंद्र सरकार की ओर से ईडब्लूएस (आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग) के लिए आरक्षण का प्रावधान किए जाने के बाद वर्ष 2018 में सीट बढ़ाकर 125 कर दी गई। वर्तमान में 125 सीट पर ही प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। सीट बढ़ाने या नया कोर्स शुरू करने पर एनएमसी की अनुमति (एलओपी) की जरूरत होती है। इसे देखते हुए एनएमसी ने शुक्रवार को अचानक निरीक्षक डॉ. संदीप सरदेसाई और डॉ. धवल परमार को निरीक्षण के लिए भेज दिया। निरीक्षकों ने दो दिन तक बारीकी से कॉलेज और संबद्ध बेस अस्पताल के एक-एक वार्ड का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संकाय सदस्यों से 10-10 मरीजों के नाम, बीमारी और निदान की सूची मांगी। इसके बाद निरीक्षकों ने वार्ड में जाकर मरीजों से भी जानकारी लेकर इसकी पुष्टि की। शनिवार रात 9 बजे तक निरीक्षकों ने कॉलेज में रिपोर्ट बनाते हुए रोज होने वाले सीटी स्कैन व अल्ट्रासाउंड टेस्ट की रिपोर्ट भी मांगी। प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने बताया कि निरीक्षण के बाद टीम लौट गई है।