एनएमसी (राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग) की एक सदस्यीय कमेटी ने मेडिकल कॉलेज में त्वचा रोग विभाग का निरीक्षण किया। यदि एनएमसी कॉलेज की तैयारियों व संसाधन संतुष्ट होती है, तो त्वचा रोग विभाग में पीजी (स्नातकोत्तर) की अनुमति मिल जाएगी। अब पीजी कोर्स की अनुमति हेतु सिर्फ मेडिसिन, स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग बाकी रह गए हैं।
शनिवार देर शाम एनएमसी की ओर से भेजे गए निरीक्षक राजकीय मेडिकल कॉलेज औरंगाबाद (महाराष्ट्र) के त्वचा रोग विभाग के एचओडी प्रो. सुधीर मेधेकर ने निरीक्षण किया। उन्होंने कॉलेज और बेस अस्पताल में त्वचा रोग विभाग सहित अन्य सेवाओं का जायजा लिया। विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक डिमरी ने उन्हें ओपीडी, आईपीडी और विभाग की ओर से संचालित सेवाओं की जानकारी दी। प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने बताया कि त्वचा रोग विभाग में एक प्रोफेसर और एक सहायक प्रोफेसर कार्यरत हैं।
यहां बता दें कि मई 2020 में संस्थान ने पीजी की अनुमति के लिए एनएमसी में आवेदन किया था। संस्थान ने 14 विभागों में एमएस/एमडी की 52 सीट मांगी है। आवेदन के नौ माह बाद इस साल फरवरी व मार्च में विभागवार एनएमसी का दौरा हुआ था। इसके बाद त्वचा रोग, मेडिसिन और स्त्री रोग विभाग का दौरा शेष रह गया था। वर्तमान में कॉलेज में सिर्फ एनॉटमी विभाग में पीजी कोर्स संचालित हो रहा है।