स्थायी रोजगार की मांग कर रहे विकास खंड कीर्तिनगर के रानीहाट और नैथाणा गांव के रेल परियोजना प्रभावितों ने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। प्रभावितों ने 10 दिन के भीतर मांगों पर कार्रवाई न होने पर आमरण अनशन और आत्मदाह की चेतावनी दी है।
शुक्रवार को गांव के पास रेल परियोजना के निर्माण स्थल के पास क्रमिक अनशन पर बैठे प्रभावित ग्रामीणों ने कहा कि उनकी कृषि भूमि पर परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। इससे खेती पर निर्भर कई परिवारों के समक्ष रोजीरोटी का संकट पैदा हो चुका है। शर्त के अनुसार वह करीब दो वर्षों से प्रभावितों को परियोजना में रोजगार दिए जाने और रेलवे स्टेशन का नामकरण नैथाणा व रानीहाट के नाम से किए जाने की मांग कर रहे है। उनकी इस मांग को अब तक पूरा नहीं किया गया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से उनकी आवाज को दबाने के लिए उन पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। 25 अगस्त को गांव के 23 लोगों को पुलिस ने बलपूर्वक गिरफ्तार कर उनपर मुकदमे दर्ज किए जबकि 3 अगस्त को अपर आयुक्त गढ़वाल समेत पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों और आरवीएनएल व कार्यदायी संस्था के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक हुई थी। इसमें उन्होंने 24 अगस्त तक मांगों पर कार्रवाई करने की बात कही थी लेकिन अब तक उनकी एक भी मांग पूरी नहीं की गई है। इससे पूर्व भी स्थानीय प्रशासन और आरवीएनएल और कार्यदायी संस्था के बीच कई बार की वार्ता और समझौता हो चुका है। कार्यदायी संस्था ने गांव के करीब 40 बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिए जाने के नाम पर तीन माह का प्रशिक्षण भी दिया लेकिन अब तक उनको रोजगार से वंचित रखा गया है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर 10 दिन के भीतर मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो उन्हें आमरण अनशन और आत्मदाह जैसे कदम उठाने को मजबूर होना पड़ेगा। इस मौके पर प्रधान आशा भट्ट, कमला देवी, बीरा देवी, उषा देवी, कल्पू देवी, जगदेश्वरी देवी, मकान सिंह, हेमवंत रावत, प्रवीन चौहान आदि क्रमिक अनशन पर बैठे।