ब्लाक थलीसैण में पशुपालकों की बकरियां संक्रामक बीमारी (पीपीआर रोग) से पीड़ित हैं जबकि विभिन्न गांवों के पशुपालकों की 250 बकरियों की अभी तक मौत हो चुकी है। ऐसे में इन पशुपालकों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। वहीं सरकारी योजना के तहत बकरियों का आवंटन करने वाली संस्था एनसीडीसी बीमारी के नियंत्रण का दावा कर रही है।
थलीसैंण ब्लाक के मुसेटी, कपरोली, कफल्ड, हस्यूंड़ी आदि गांवों में कई दिनों से पशुपालक बकरियों की बीमारी से परेशान हैं। मुसेटी गांव के पशुपालक दिनेश कुमार व रमेश भंडारी ने बताया कि सरकार ने एनसीडीसी (राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम) के तहत क्षेत्र के पशुपालकों को 10 बकरियों व 1 बकरा आजीविका विकास के लिए प्रदान किया। प्रदेश के सहकारिता मंत्री ने स्वयं ग्रामीणों को यह बकरियां बाटीं, लेकिन यह बकरियां अब बीमारी की चपेट में आने से मर रही हैं। एनसीडीसी के साथ ही पशुपालन विभाग से बकरियों में फैल रहे संक्रमण को लेकर जानकारी दी गई, लेकिन उपचार के बाद भी बकरियाें की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पशुपालकों की 250 बकरियां मर चुकी हैं। पशुपालक परिवारों की आजीविका बकरीपालन पर ही निर्भर थी।
क्षेत्र में इन पशुपालकों को हुई पशुहानि
नाम गांव मृत बकरियों की संख्या
दिनेश कुमार मुसेटी 65
रमेश भंडारी मुसेटी 29
गुणानंद कफल्ड 19
अनिल सिंह कफल्ड 21
ज्ञान सिंह कफल्ड 20
सत्यप्रकाश ढौंडियाल हस्यूंड़ी 48
सते सिंह कपरोली 24
मनवर सिंह कपरोली 24
क्या है पीपीआर रोग
पीपीआर रोग भेड़-बकरियों में होने वाली एक संक्रामक बीमारी है। यह पेस्ट्री डी पेट्रिस एमिनेट्स नामक विषाणुओं से फैलती है। इस रोग की चपेट में आने से 50 से 60 फीसदी पशुओं की समय पर इलाज न मिलने के कारण मौत हो जाती है।
शिकायत मिलने पर लगातार क्षेत्र में बीमार बकरियों का डोर-टू-डोर उपचार किया जा रहा है। इनमें अधिकतर बकरियों के बच्चे हैं, जिन्हें सर्दी-जुकाम की शिकायत है। संक्रामक रोग को लेकर कोई पुष्टि नहीं है। क्षेत्र में एनसीडीसी 150 पशुपालकों को बकरियां आवंटित कर चुका है। - डा. जगत, फील्ड वेक्टेरियन, एनसीडीसी।
- थलीसैण क्षेत्र में पशुपालकों की बकरियों में पीपीआर नामक संक्रामक बीमारी होने का मामला सामने आया है। पशुओं में बीमारी के नियंत्रण को लेकर विभाग लगातार कार्य कर रहा है। क्षेत्र का जल्द ही निरीक्षण किया जाएगा। - डा. एसकेएस बर्त्वाल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पौड़ी।