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उत्तराखंड राज्य स्थापना में विशेष भूमिका रही कल्याण की

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नैनीताल। भाजपा के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह नहीं रहे लेकिन उत्तराखंड के लोग एक खास वजह से उन्हें कभी भुला नहीं सकते। वजह है कि कल्याण सिंह इस रूप में उत्तराखंड राज्य के शिल्पी रहे कि इसका प्रस्ताव पहली बार उनकी ही सरकार में केंद्र को भेजा गया। यह एक संयोग ही है कि मृत्यु के ठीक 30 वर्ष पूर्व 20 अगस्त 1991 को ही पृथक उत्तराखंड राज्य का प्रस्ताव पहली बार कल्याण सिंह ने ही यूपी असेंबली से केंद्र को भेजा था। हालांकि उत्तराखंड राज्य की स्थापना की मांग इससे बहुत पहले से विभिन्न राजनैतिक दलों और मंचों की ओर से समय-समय पर उठाई जाती रही थी।
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उत्तराखंड क्रांति दल का तो गठन ही इस मांग को लेकर हुआ था और इसके पहले विधायक जसवंत सिंह बिष्ट ने 1990 में पहली बार यूपी असेंबली में इस आशय का प्रस्ताव भी रखा था। अन्य बहुत से नेताओं को भी इस मांग को रखने का श्रेय रहा लेकिन उस दौर में सत्ता के केंद्र में रही कांग्रेस पार्टी पृथक राज्य की घोर विरोधी थी और क्षेत्र के वरिष्ठ नेता स्व. एनडी तिवारी का यह बयान बहुत चर्चित रहा था, जब उन्होंने कहा था कि पृथक उत्तराखंड राज्य उनकी लाश पर बनेगा। इसके उलट भाजपा छोटे राज्यों की प्रबल पक्षधर थी। कल्याण सिंह ने सत्ता में आते ही पृथक राज्य का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया था। तब उत्तर प्रदेश में पहाड़ों के लिए अलग से पर्वतीय विकास मंत्रालय होता था। पूरन शर्मा पर्वतीय विकास मंत्री थे उन्होंने यह प्रस्ताव रखा था जो ध्वनिमत से पारित किया गया था। तब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी अत: केंद्र से राज्य की स्थापना को स्वीकृति नहीं मिली। हालांकि कल्याण सिंह की पृथक राज्य को लेकर प्रतिबद्धता इतनी ज्यादा थी कि उन्होंने तब पर्वतीय विकास मंत्रालय का नाम बदलकर उत्तराखंड विकास मंत्रालय कर दिया था। बाद में समाजवादी पार्टी की मुलायम सरकार ने भी पृथक राज्य का प्रस्ताव केंद्र को पुन: भेजा था।
इस बीच, 1994 में हुए उत्तराखंड राज्य आंदोलन और तमाम शहीदों की कुर्बानियों ने तत्कालीन सरकारों को पृथक राज्य की स्थापना के लिए मजबूर कर दिया।1996 में केंद्र में भाजपा सरकार बनी लेकिन केवल 13 दिन चली। इसके बाद 1998 में भाजपा सरकार 13 महीने ही चल पाई। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 21 दलों की गठबंधन सरकार बनी तो भाजपा ने तुरंत ही उत्तरांचल नाम से पृथक राज्य की स्थापना कर दी। भाजपा छोटे राज्यों की प्रबल समर्थक थी और उत्तरांचल के साथ ही दो और राज्यों झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी स्थापना भाजपा ने की थी। उत्तरांचल का नाम बाद में एनडी तिवारी सरकार में बदल कर उत्तराखंड किया गया था। सितंबर 1997 से नवंबर 1999 तक पुन: यूपी में कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री रहने के दौरान पृथक राज्य की स्थापना की औपचारिकताओं को गति मिली और इसकी तमाम अड़चनें कल्याण सिंह ने दूर कीं। संवाद
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पृथक राज्य बनने पर शिरकत नहीं कर पाए कल्याण
नैनीताल। ये विधि का विधान ही कहा जाएगा कि पृथक उत्तराखंड राज्य के प्रबल समर्थक और इसके शिल्पी रहे कल्याण सिंह राज्य की स्थापना के दौरान खुद भाजपा में ही नहीं थे। पार्टी से विवाद के बाद उन्होंने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बना ली थी और राज्य स्थापना के समय यूपी और केंद्र दोनों जगह भाजपा के सत्ता में होने के बावजूद वे राज्य स्थापना के कार्यक्रमों में भाग नहीं ले पाए। तब राजनाथ सिंह यूपी के सीएम थे और वे ही इन कार्यक्रमों में शामिल हुए।
तेलंगाना भी बन गया होता तभी
नैनीताल। भाजपा आंध्र प्रदेश में तेलंगाना राज्य भी बनाना चाहती थी लेकिन तेलंगाना राज्य की प्रबल मांग के बावजूद राज्य में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी और तत्कालीन सीएम चंद्र बाबू नायडू इसके विरोध में थे। अत: इसका प्रस्ताव राज्य में पारित नहीं हो सका। तेलंगाना की मांग इतनी प्रबल थी कि चंद्रबाबू सरकार में तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष कल्वाकुन्तला चंद्रशेखर राव ने 2001 में तेलंगाना के समर्थन में पार्टी और पद से इस्तीफा देकर पृथक तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) पार्टी ही बना ली। बाद में हालात बदलने और इस मांग के बहुत जोर पकड़ने पर कांग्रेस ने 2014 में तेलंगाना राज्य की स्थापना की। हालांकि कांग्रेस को इसका कोई लाभ नहीं मिला और राज्य बनने के बाद से लगातार दो बार टीआरएस ही सत्ता में है और चंद्रशेखर राव मुख्यमंत्री हैं।
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