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कहीं ‘पुरानी बीमारी’ का शिकार ना हो जाए आईसीयू की योजना

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प्रतीकात्मक फोटो।
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हल्द्वानी। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य महकमे में एक अलग ही प्रचलन है। यहां सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के नाम पर ढांचा तो खड़ा कर दिया जाता है लेकिन स्टॉफ की कमी से उस ढांचे का कई बार पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो पाता है। ऊपर से विभाग बिना स्टॉफ के ही बेस अस्पताल में नई व्यवस्थाओं को तैयार करने में जुटा है।
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बेस अस्पताल में आईसीयू वार्ड बनाने की तैयारी चल रही है। सब कुछ ठीक रहा तो यहां आने वाले कुछ दिनों में आईसीयू तैयार हो जाएगा। लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है इस आईसीयू को चलाने के लिए स्टॉफ की जरूरत। आईसीयू के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक, तकनीशियन और नर्सेज की आवश्यकता होगी। कोविड-19 के चलते बेस अस्पताल में आईसीयू वार्ड अगर बन गया तो प्रशिक्षित स्टॉफ का इंतजार करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग के पिछले अनुभवों को देखते हुए यह होगा इस पर संशय है। सरकारी विभाग में पहले से ही कई इमारतें स्टाफ की कमी के चलते बंद पड़ी हुई हैं।
- आईसीयू के लिए ट्रेंड स्टाफ चाहिए, जो अभी उपलब्ध नहीं है। इसकी डिमांड भेज दी गई है। - डॉ. हरीश लाल, सीएमएस, बेस अस्पताल
यह पड़े हैं बंद
नया ओपीडी और ओटी भवन -
बेस अस्पताल की ओपीडी की तीसरी मंजिल पर लाखों की लागत से नया ओटी और ओपीडी वार्ड के लिए भवन चार साल में बना था। यहां फर्नीचर भी खरीद के रख दिया था। लेकिन स्टॉफ की कमी के चलते यह भी बंद पड़ा है। उद्घाटन के बावजूद इसका आजतक इस्तेमाल नहीं हुआ है।
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हृदय रोग केंद्र -
जिला उद्योग केंद्र के पास स्थित हृदय रोग केंद्र डॉक्टर एवं स्टाफ की कमी से सालों से बंद पड़ा है। अब तो लोग भूल भी गए हैं कि यहां कोई स्वास्थ्य केंद्र भी था।
महिला अस्पताल की नई बिल्डिंग -
महिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए करोड़ों की लागत से नई बिल्डिंग बनी। पहले तो यह भी स्टॉफ की कमी के चलते बंद पड़ी रही। बाद में मौजूदा स्टॉफ से ही इस बिल्डिंग में चिकित्सीय सेवाएं देना शुरू कर दिया गया।
कैंसर इंस्टीट्यूट में नए कक्ष -
मेडिकल कॉलेज के अधीन स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट के दूसरे फ्लोर में कई कक्ष बनाए गए हैं, इनका इनका प्रयोग रोगियों के इलाज के लिए किया जाना था लेकिन सालों गुजर गए इन कमरों का और संसाधनों का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो सका है।
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