लालकुआं (नैनीताल)। सैनिक कल्याण विभाग उत्तराखंड की ओर से सैनिक सम्मान यात्रा के पहले चरण में शहीद सैनिकों के घरों से मिट्टी उठाने का काम शुरू हो गया है। पुलिस, प्रशासनिक, सैन्य अधिकारियों और विधायक की मौजूदगी में शनिवार को बिंदुखत्ता में शहीद मोहन नाथ गोस्वामी समेत 12 से ज्यादा शहीदों के घर से मिट्टी उठाकर सैन्य धामों के लिए भेजी गई। इस दौरान कार्यक्रम स्थल शहीदों के जयकारों से गूंज उठा।
शनिवार सुबह शहीद स्मारक स्थल से दो दर्जन से अधिक गाड़ियों का काफिला इंदिरानगर निवासी अशोक चक्र विजेता शहीद मोहन नाथ गोस्वामी के आवास पहुंचा। जहां उनकी पत्नी भावना गोस्वामी और बेटी भूमिका ने घर के आंगन से मिट्टी उठाकर सैन्य अधिकारियों को सौंपी। इसके बाद सैनिक सम्मान यात्रा शहीद गोविंद सिंह पपोला, शहीद शेखर चंद्र फुलारा, शहीद कृष्ण लाल, शहीद जीवन खोलिया, शहीद धनीराम, शहीद जगत सिंह सहित 12 से अधिक शहीदों के घरों तक गई। इस दौरान जिला सैनिक कल्याण पुनर्वास अधिकारी कैप्टन आरएस धपोला, पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष मेजर बीएस रौतेला, भारतीय सेना की हल्द्वानी छावनी की मेंजर मोहिता मल्होत्रा, विधायक नवीन दुम्का, एसडीएम मनीष कुमार सिंह, सीओ सर्वेश पवार, पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल, भाजपा नेता हेमंत द्विवेदी, जिला अध्यक्ष प्रदीप बिष्ट, लक्ष्मण खाती, डॉ. मोहन बिष्ट, दीवान सिंह बिष्ट, कांग्रेस नेता बीना जोशी, दीपक जोशी, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, प्रकाश मिश्रा, दलवीर सिंह कफोला, बलवंत दानू, सुंदर सिंह खनका, हुकम सिंह, चंचल सिंह कोरंगा, गोविंद फुलारा आदि मौजूद रहे।
शहीद मोहन नाथ गोस्वामी के परिजनों ने लगाया उपेक्षा का आरोप
लालकुआं। सैनिक सम्मान यात्रा के दौरान अशोक चक्र विजेता शहीद मोहन नाथ गोस्वामी की मां राधिका देवी ने उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शहीद के नाम पर बनाए जाने वाले स्टेडियम का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। कॉलेज का नाम शहीद के नाम पर रखे जाने का आश्वासन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। कार्यक्रम स्थल से विधायक नवीन दुम्का के शहीद की मां से बात किए बिना चल जाने पर पूर्व सैनिकों और शहीद के परिवार ने नाराजगी जताई। शहीद की मां ने कार्यक्रम में शिरकत करने से भी इनकार कर दिया। लगभग आधे घंटे तक पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी और सैन्य अधिकारी शहीद की मां और बड़े भाई को मनाते रहे परंतु उन्होंने मिट्टी देने वाले कार्यक्रम में शिरकत नहीं की। शहीद के बड़े भाई शंभू नाथ गोस्वामी ने कहा कि भाजपा सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान शहीद मोहन नाथ गोस्वामी के लिए कोई भी काम नहीं किया। वीरांगना भावना गोस्वामी ने कहा कि वह 15 दिन पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिली तो उनका कहना था कि अपने विधायक से बात करो। जब वह विधायक से बात कर रही है तो वह कहते हैं मुख्यमंत्री से बात करो।
मान मन्नौवल के बाद घर से उठाई माटी
बिंदुखत्ता। परिजनों के हंगामे के कारण कार्यक्रम स्थल पर असहज जैसी स्थिति रही। शहीद मोहन नाथ गोस्वामी की मां राधिका देवी ने सरकार पर आरोप लगाया कि अब तक कई नेता, अधिकारी, मंत्री और खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री उनके घर पहुंचे थे और कई घोषणाएं की जो अब तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में वह अपने आंगन से मिट्टी उठाने की इजाजत नहीं देंगी। उन्होंने कहा कि अगर जल्द उनकी नहीं सुनी गई तो वह सरकार के खिलाफ अपनी बेटी के साथ आमरण अनशन पर बैठेगी। शहीद के भाई शंभू नाथ गोस्वामी ने कहा कि सरकार के रवैये से साफ जाहिर हो रहा है कि सरकार सैनिकों के प्रति गंभीर नहीं है।
10 आतंकवादियों को मार गिराया था मोहन नाथ ने
बिंदुखता। शहीद मोहन नाथ गोस्वामी ने दो सितंबर 2015 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा के हंदवाड़ा के जंगल में आतंकियों से लोहा लेते हुए 10 आतंकियों को मार गिराया। बाद में उन्होंने भी अपनी शहादत दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने शहीद मोहन नाथ गोस्वामी को अशोक चक्र से नवाजा था।
विधायक का पक्ष
पूरा कार्यक्रम अच्छे ढंग से निपटा। हंगामे की बात निराधार है। शहीद की पत्नी और बेटी ने खुद मिट्टी दी। शहीद की मां न तो मेरे सामने आई न ही कोई बात हुई। स्टेडियम अब तक क्यों नहीं बना इस बारे में शहीद को पत्नी को बताया था कि वन विभाग की जमीन का मामला है। जमीन संबंधित निश्चित और नियमित प्रक्रिया है। यह एनजीटी से होता है। हालांकि 95 प्रतिशत तक सफलता मिल चुकी है। मैं शहीद की मां का सम्मान करता हूं। उन्होंने बेटा खोया है। पीड़ा स्वाभाविक है।
-नवीन दुम्का, विधायक लालकुआं