नैनीताल। हाईकोर्ट ने रामगढ़ ब्लॉक के सतोली गांव में बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए बोरिंग किए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार, केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने और बोरिंगकर्ता बिल्डर को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी नैनीताल को इस मामले में चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि डीएम बताएं कि सतोली में पानी की अवैध बोरिंग के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 दिसंबर की तिथि नियत की गई है।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार सतोली के ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि भवाली निवासी विपिन पंत ने सतोली में अपने आवासीय क्षेत्र में पानी के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी, जबकि उस व्यक्ति का गांव में मकान नहीं है। पूरे क्षेत्र में पहले से ही स्वजल की पेयजल लाइन उपलब्ध है। याचिकाकर्ता ग्रामीणों ने कहा कि विपिन पंत को 2011 में बोरिंग की अनुमति दी गई थी लेकिन उसने बोरिंग नहीं की।
उसने 10 साल पहले मिली अनुमति के आधार पर पुन: एनओसी मांगी। इस पर नैनीताल तहसील ने पुरानी अनुमति को देखते हुए नए सिरे से अनुमति देने की आवश्यकता नहीं समझी और पुरानी अनुमति के आधार पर ही बोरिंग करने के लिए कह दिया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इसमें केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की अनुमति लेनी जरूरी थी। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार, केंद्र सरकार से जवाब व बोरिंगकर्ता बिल्डर को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने डीएम नैनीताल को मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है।