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PHOTOS: बारिश के दिए जख्मों पर धूप का मरहम, जलभराव के दौरान भीगी किताबों को सुखाते बच्चे; देखिए पांच तस्वीरें

Wed, 10 Jul 2024 11:00 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

हल्द्वानी में बरसात के कारण जलभराव की दुश्वारियां झेल रहे आंवला चौकी स्थित दुर्गा कॉलोनी के 50 प्रभावित परिवारों के लिए मंगलवार का सूरज बड़ी राहत लेकर आया।
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बारिश के दिए जख्मों पर धूप का मरहम - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी में बरसात के कारण जलभराव की दुश्वारियां झेल रहे आंवला चौकी स्थित दुर्गा कॉलोनी के 50 प्रभावित परिवारों के लिए मंगलवार का सूरज बड़ी राहत लेकर आया। आपदा के दिए जख्मों से लड़कर प्रभावित फिर से जीवन को संजोने में जुट गए हैं। हालांकि जीवन को फिर से पटरी पर लाना प्रभावितों के लिए चुनौती से कम नहीं है।

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जलभराव के दौरान भीगी किताबों को सुखाते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
दुर्गा कॉलोनी में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले मजदूर परिवारों के लिए दो जुलाई की रात भयावह रही। भारी बारिश के चलते पुलिया चोक होने के कारण देर रात कॉलोनी जलमग्न हो गई। घरों में रखा राशन और सामान जलभराव की भेंट चढ़ गया। कई मवेशी भी जलभराव में डूबने से मर गए। लोगों ने किसी बच्चों को बचाया और उन्हें सड़क पर लाए। 30 परिवारों को भारी बारिश के बीच सड़क पर ही रात गुजारनी पड़ी।


 

बारिश के बाद धूप - फोटो : अमर उजाला
इन परिवारों को खाने के भी लाले पड़े हैं। प्रशासन की ओर से बांटा गया राशन भी जल्द समाप्त हो गया है। बारिश के चलते लोग मजदूरी के लिए भी नहीं जा सके। मंगलवार को मौसम खुलने पर मजदूर काम पर गए जबकि घर में महिलाओं ने बचाखुचा सामान धूप में सुखाया।

धूप - फोटो : अमर उजाला

प्रभावित चंद्रकला ने बताया कि जलभराव से राशन और सामान खराब हो गया। सांप के काटने से उसकी तीन भैंसें मर गई हैं। इससे रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। चटनी और नमक से रोटी खाकर जीवन गुजार रहे हैं। प्रभावित सुंदर देवी ने बताया कि जलभराव ने सबकुछ खत्म कर दिया। धूप आने पर मजदूरी के लिए जा पाए। रजनी देवी ने बताया कि जलभराव से राशन बर्बाद हो गया। बारिश काफी नुकसान कर गई। 

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आग के बाद पानी के जख्म दे गए दर्द - फोटो : अमर उजाला
आग के बाद पानी के जख्म दे गए दर्द
दुर्गा कॉलोनी निवासी शबनम के जख्म जलभराव ने फिर से ताजा कर दिए। शबनम ने बताया कि बीते साल झोपड़ी में आग लगने से उसकी दिव्यांग बेटी के कागजात जल गए थे। इसके बाद से वह लगातार विभागों के चक्कर काट रही हैं लेकिन उनकी बेटी को दिव्यांग पेंशन नहीं मिल पा रही है। बरसात में घर का राशन और जरूरी सामान बर्बाद हो गया। अब दिव्यांग बेटी की परवरिश कैसे होगी, यही चिंता सता रही है।
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