रामनगर (नैनीताल)। सीता स्वयंवर में जब रावण समेत विभिन्न देशों के राजा शिव धनुष नहीं तोड़ पाए तो महर्षि विश्वामित्र के कहने पर श्रीराम शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे तोड़ देते हैं। इसके बाद जय श्रीराम के नारे लगे और सीता श्रीराम के गले में वरमाला डाल देती हैं। स्थानीय कलाकारों ने प्रगतिशील सांस्कृतिक पर्वतीय समिति पैठपड़ाव की रामलीला में सुंदर अभिनय किया।
कुमाऊंनी शैली पर आधारित रामलीला के चौथे दिन रामलीला का शुभारंभ ब्राह्मण समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष हेम चंद्र भट्ट ने किया। रामलीला मंच पर रावण-बाणासुर संवाद, श्रीराम के द्वारा धनुष तोड़ना, परशुराम का तपोवन से प्रस्थान, परशुराम-लक्ष्मण संवाद, जनक की ओर से अयोध्या में दूत भेजना, श्रीराम विवाह उत्सव की लीला का मंचन कलाकारों ने किया। इसमें राम सुमित लोहनी, लक्ष्मण अमित लोहनी, सीता ललित बिष्ट, जनक गणेश पंत, परशुराम भुवन जोशी, रावण भुवन मौलेखी, वाणासुर नीरज जोशी आदि कलाकारों ने सुंदर अभिनय किया। इस दौरान दिनेश सत्यवली, चंदन कोटवाल, रोहित गोस्वामी, जगदीश तिवारी, वीरेंद्र पांडे, विजय पपनै, अमिता लोहनी, दीपा सुयाल, नीमा मठपाल मौजूद रहे।