वीरभट्टी पुल के पास दोबारा मलबा आने के चलते मार्ग में फंसे बड़े वाहन। संवाद न्यूज एजेंसी
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ज्योलीकोट (नैनीताल)। कुमाऊं की लाइफ लाइन ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग में वीरभट्टी के पास आए मलबे को हटाकर मंगलवार को पांचवें दिन बमुश्किल पांच घंटे तक ही यातायात सुचारू हो पाया। दोबारा मलबा आने से मार्ग में एक बार फिर से यातायात ठप हो गया। इस कारण पहाड़ की ओर जा रहे बड़े वाहन रास्ते में ही फंस गए। दोपहिया वाहन चालकों को नैनीताल-भवाली, भीमताल-रानीबाग मार्ग से भेजा गया।
वीरभट्टी में नए पुल निर्माण और सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। शुक्रवार की शाम से बंद इस मार्ग पर एनएच ने मंगलवार की सुबह 8:30 बजे यातायात सुचारु कर दिया गया। दोपहर बाद शुरू हुई बारिश के कारण पहाड़ से फिर मलबे ने कुमाऊं की लाइफ लाइन में ब्रेक लगा दिए। यातायात ठप होने से वाहन चालकों, यात्रियों और स्थानीय लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ा। मार्ग बंद होने के बाद छोटे वाहनों को नैनीताल और भवाली होते हुए भेजा जा रहा है। पहाड़ों को अन्य सामग्री लेकर जा रहे भारी वाहन, डीजल-पेट्रोल के टैंकर और गैस वाहन बीच मार्ग में ही फंसे हैं। विभाग के अवर अभियंता दीपक तिवारी ने कहा कि पोकलैंड और जेसीबी दोनों मौके से कुछ दूरी पर मौजूद हैं। खतरे को देखते हुए बारिश और मलबे के रुकने का इंतजार किया जा रहा है।
कई विभागों को आर्थिक नुकसान
ज्योलीकोट। मलबे की वजह से एनएच, ऊर्जा निगम, जलसंस्थान और वन विभाग को नुकसान उठाना पड़ रहा है। नेशनल हाईवे के सहायक अभियंता एमसी जोशी ने बताया कि चार दिन में ढाई से तीन लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। जलसंस्थान के ईई संतोष उपाध्याय ने बताया कि तीन मुख्य लाइनें मलबे में दबी है। इन्हें शिफ्ट करना पड़ा तो 3 से 4 लाख रुपये व्यय होने का अनुमान है। ऊर्जा निगम के एसडीओ प्रियंक पांडे ने बताया कि टूटी लाइनों को दुरस्त करने में 70 हजार रुपये व्यय होने का अनुमान है। मनोरा रेंज के वनक्षेत्राधिकारी भूपाल मेहता ने बताया कि विभिन्न प्रजातियों के पौधों को भूस्खलन से नुकसान पहुंचा है।
मंडी नहीं पहुंच पा रहे किसानों के उत्पाद
हल्द्वानी। सड़क अवरुद्ध होने से सबसे अधिक नुकसान पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों को हो रहा है। पांच दिनों से पर्वतीय क्षेत्र के 75 फीसदी उत्पाद मंडी तक नहीं पहुंच पाए हैं।
नवीन मंडी के निरीक्षक सौरभ सिंह डंगवाल ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्र से रोजाना करीब दो सौ छोटे वाहनों में सैकड़ों कुंतल सब्जी हल्द्वानी मंडी आती है। आलू फल आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जीवन सिंह कार्की ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों के उत्पाद मंडी तक नहीं पहुंचने से काफी नुकसान हो गया है। इधर, मंडी सचिव विश्वविजय सिंह देव ने कहा कि मंडी में पर्वतीय क्षेत्र के उत्पादों की आवक में कमी आई है।