हल्द्वानी। पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। पर्यटन केवल घूमने की इच्छा भर तक सीमित नहीं रह गया है। युवा पर्यटन से जुड़े कोर्स की पढ़ाई इसके माध्यम से निजी क्षेत्र में अच्छी नौकरी पा सकते हैं। एमबीपीजी कॉलेज में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वद्यालय (इग्नू) के अध्ययन केंद्र में पर्यटन से जुड़े कोर्स संचालित हो रहे हैं।
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ये हैं पर्यटन से जुड़े कोर्स
1- सीटीएस (सर्टिफिकेट इन टूरिज्म स्टडीज) कोर्स। अवधि छह माह, अधिकतम 2 वर्ष है। फीस 1800 रुपये है।
2. डीटीएस (डिप्लोमा इन टूरिज्म स्टडीज) एक वर्षीय पाठ्यकम है। अवधि अधिकतम 2 वर्ष है। 3600 रुपये है।
3. बीटीएस (पर्यटन में स्नातक पाठ्यकम)। तीन वर्षीय पाठ्यक्रम है। अवधि अधिकतम 6 वर्ष है। फीस प्रतिवर्ष 3000 रुपये है।
4. एमटीटीएम (पर्यटन में स्नातकोत्तर) अवधि अधिकतम 4 वर्ष है। फीस 10,800 रुपये है।
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रोजगार की संभावनाएं
टूरिज्म इंडस्ट्री: यह इंडस्ट्री लंबे समय से विकास की पट्टी पर दौड़ रही है। गाइड से शुरू होने वाला कॅरियर बेहतर टूर ऑपरेटर व प्रबंधक तक पहुंचाती है। आमदनी पर्यटकों की संख्या पर निर्भर करती है।
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होटल:- मुख्य रूप से सुपरवाइजर व क्राफ्टमैन की आवश्यकता रहती है जिनकी मांग अपेक्षाकृत पूर्ति से ज्यादा ही बनी रहती है। इस काम को करने के लिए प्रशिक्षण का होना जरूरी है। यहां फ्रंट ऑफिस ऑपरेशन (स्वागत कार्य), फूड प्रोडक्शन (भोजन बनाना), फूड एंड बैवरेज तथा हाउस कीपिंग आदि से जुड़े लोगों की मांग रहती है।
टूर ऑपरेटर:- इसमें विभिन्न एजेंसियां मिल कर काम करती हैं जो आधुनिक सुविधाओं के साथ आरामदायक यात्रा की सेवा उपलब्ध कराती हैं।
रिटेल ट्रेवल एजेंट:- इसका मुख्य कार्यक्षेत्र ट्रेवल एजेंसी व पर्यटकों के मध्य की भूमिका होती है। यह पर्यटक को विभिन्न एजेंसियों की जानकारी देता है।
कोट
पर्यटन से जुड़े कोर्स करने से युवाओं को रोजगार के कई रास्ते खुलते हैं। वे चाहें तो निजी क्षेत्र मेें नौकरी कर सकते हैं या फिर इसके माध्यम से स्वरोजगार अपना सकते हैं। ट्रेवल एजेंसी मैनेजर, टूर एक्जीक्यूटिव, टूर प्रबंधक, गाइड, पब्लिसिटी ऑफिसर के तौर पर भी व्यक्ति काम कर सकते हैं। पर्यटन को एक विषय के तौर पर लेकर उसमें नेट व पीएचडी करके असिस्टेंट प्रोफेसर भी बन सकते हैं।
- डॉ. कमरुद्दीन, कोआर्डिनेटर इग्नू अध्ययन केंद्र, एमबीपीजी कॉलेज