सरकार की कुपोषण मुक्त भारत बनाने की योजना शहरों के लिए नाकाम साबित हो रही है। जिले के बाल विकास विभाग से जुलाई तक मिले आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में कुपोषित बच्चे अधिक मिले हैं जिन्हे विभाग की ओर से चिह्नित कर पोषण आहार से जोड़ा जा रहा है।
जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से संचालित 1416 आंगनबाड़ी केंद्रों में हर माह पोषण सप्ताह के तहत पांच तारीख को बच्चों का वजन किया जाता है जिसमें कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें पोषक तत्व दिए जाते हैं।
वर्ष-2023 में जुलाई तक प्राप्त आंकड़ों में जिले भर से 264 कुपोषित और 29 अतिकुपोषित मिले। कुपोषित बच्चों में सर्वाधिक 81 हल्द्वानी शहर क्षेत्र के हैं। दूसरे स्थान पर रामनगर है। कोटाबाग में सबसे कम सात अतिकुपोषित बच्चे मिले हैं।
अतिकुपोषित बच्चे गांवों में अधिक
अतिकुपोषित बच्चों में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे अधिक मिले हैं जिनमे काेटाबाग से सात और ओखलकांडा में छह बच्चे कुपोषित मिले हैं। जबकि हल्द्वानी शहर क्षेत्र में भी छह बच्चे कुपोषित मिले हैं। वहीं रामगढ़ और बेतालघाट में अतिकुपोषितों की संख्या शून्य है।
शहरी क्षेत्र में बनभूलपुरा से सबसे अधिक बच्चे कुपोषित मिलते हैं जबकि दो अन्य केंद्रों के बच्चे कुपोषित मिले हैं। इन्हें पोषण से जोड़कर कुपोषण मुक्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अतिकुपोषित बच्चों को आरकेएसके की टीम के जरिये निगरानी में रखते हुए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
- शीला रौतेला, बाल परियोजना अधिकारी, हल्द्वानी शहर क्षेत्र
जुलाई तक जारी आंकड़े
क्षेत्र कुपोषित बच्चे
हल्द्वानी शहर 81
रामनगर 47
हल्द्वानी ग्रामीण 43
भीमताल 31
कोटाबाग 24