नैनीताल। हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि पीड़ित अपनी समस्याएं लेकर पुलिस के पास जाते हैं, लेकिन पुलिस केस दर्ज नहीं करती है। यही वजह है कि हाईकोर्ट में प्रत्येक दिन पांच-छह केस सुरक्षा दिलाए जाने को लेकर दायर होते हैं। हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल से कहा है कि वह डीजीपी को निर्देश दें कि पुलिस के पास जितनी शिकायतें आती हैं चाहे वह जमीन संबंधी विवादों से जुड़ीं हों या फिर सुरक्षा से, सभी मामलों को गंभीरता से लें और मामला दर्ज कर दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करें। मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने हरिद्वार के एसएसपी को भी निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को सुरक्षा मुहैया कराएं।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के उस संदेश पर भी कड़ी नाराजगी जताई, जिसमें उसने पुलिस की ओर से कार्रवाई न होने पर कोर्ट परिसर में आत्मदाह करने की धमकी दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हिदायत दी कि यदि दोबारा ऐसी हरकत की गई तो अदालत उसके खिलाफ भी अवमानना की कार्रवाई करेगी। हालांकि, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इस मामले में कोर्ट से क्षमा याचना की।
यह है मामला
हरिद्वार निवासी तेजिंदरजीत सिंह कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसे सुरक्षा दिलाने की प्रार्थना की थी। उनका कहना था कि कैलाशनंद स्वामी उनकी जमीन को हड़पना चाहते हैं और उनसे उसे व उसकी संपति को खतरा है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस को 2019 में शिकायत की थी लेकिन उनकी शिकायत पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि निचली अदालत ने भी उनकी जमीन को बेचने या खुर्द बुर्द करने पर रोक लगाई है, उसके बाद भी विपक्षी ने उनकी जमीन बेच दी। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि इस मामले में क्या कार्यवाही की गयी लेकिन सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।