बागी विधायकों के मामले में सोमवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल से जो सवाल किए थे मंगलवार को उनके वकील पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल एवं उनके बेटे अमित सिब्बल ने कोर्ट में स्पीकर का पक्ष रखा।
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पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तिथि नियत की है। बता दें कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीए सुंदरम और दिनेश द्विवेदी ने हाईकोर्ट में बागी विधायकों का पक्ष रखा था।
मंगलवार को स्पीकर के अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट के सवाल ‘सदन में वित्त विधेयक पारित हुआ या नहीं’ के जवाब में कहा कि उनका वित्त विधेयक पारित होने संबंधी कोई बिंदु नहीं है बल्कि बागी विधायकों द्वारा सदन के बाद गैलरी और बस समेत जहाजों में भाजपा के साथ जाना उनका मुख्य मुद्दा है। कपिल सिब्बल ने कहा कि इन 9 बागियों में से एक पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और दूसरा कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत हैं।
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कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि भाजपा ने 18 मार्च की सुबह ही सरकार के अल्पमत में होने की बात इसलिए कही थी क्योंकि उनके 26 और कांग्रेस के 9 बागी विधायकों ने पत्र में हस्ताक्षर किए थे जो इन 9 विधायकों का चरित्र दिखाता है। साथ में कहा कि इन 35 विधायकों ने राज्यपाल से कहा कि उन्होंने सदन में मत विभाजन की मांग की थी जिसका मतलब ये हुआ कि वो सरकार गिराना चाहते थे क्योंकि उन्होंने दूसरा गठबंधन कर लिया था।
स्पीकर की ओर से कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि बर्खास्त विधायकों ने मुख्यमंत्री का विरोध नहीं किया था, क्योंकि उन्होंने अपने किसी विरोधी पत्र में मुख्यमंत्री का जिक्र तक नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ये दर्शाता है कि याचिकाकर्ता का मुख्यमंत्री का विरोध वाला दावा गलत है।
यह है पूरा मामला
हरक सिंह रावत
- फोटो : AmarUjala
कर्नाटक के येदियुरप्पा केस को कपिल सिब्बल ने उत्तराखंड से भिन्न बताते हुए कहा कि वहां के 13 विधायकों ने राज्यपाल को अलग-अलग ज्ञापन देकर सरकार को बर्खास्त करने की मांग की थी, लेकिन उत्तराखंड के नौ विधायकों ने भाजपा के 26 विधायकों के साथ संयुक्त ज्ञापन राज्यपाल को देकर सरकार की बर्खास्तगी की मांग की थी जो स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने के अंतर्गत दल बदल कानून में आता है।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की अग्रीम सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तिथि नियत की है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी, पूर्व महाधिवक्ता यूके उनियाल, साकेत बहुगुणा तथा विकास बहुगुणा पैरवी के दौरान मौजूद रहे।
बागी विधायक सुबोध उनियाल, शैला रानी रावत, उमेश शर्मा काऊ, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, हरक सिंह रावत, अमृता रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल औप प्रदीप बत्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 27 मार्च को स्पीकर की ओर से उनकी सदस्यता को समाप्त करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिसमें उन्होंने कहा कि पार्टी की खिलाफत नहीं की थी वे केवल मुख्यमंत्री का विरोध कर रहे थे।
बागियों ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि 18 मार्च को वित्त विधेयक के खिलाफ उन्होंने सदन में मत विभाजन की मांग की थी। इसका आशय यह नहीं है कि वे कांग्रेस छोड़कर दूसरी पार्टी में चले गए हैं।
कोर्ट में क्या कहा कपिल सिब्बल ने
- उनका वित्त विधेयक पारित होने संबंधी कोई बिंदु नहीं, बल्कि बागी विधायकों का भाजपा के साथ जाना मुख्य मुद्दा
- नौ बागियों समेत भाजपा विधायकों ने सदन में मत विभाजन की मांग इसलिए की क्योंकि उन्होंने गठबंधन कर लिया था और सरकार गिराना चाहते थे
- बर्खास्त विधायकों ने मुख्यमंत्री का विरोध नहीं किया था, क्योंकि उन्होंने अपने किसी विरोध पत्र में मुख्यमंत्री का जिक्र तक नहीं किया
- कर्नाटक के येदियुरप्पा केस को कपिल सिब्बल ने उत्तराखंड से भिन्न बताया, कहा-वहां के 13 विधायकों ने अलग-अलग ज्ञापन देकर सरकार बर्खास्तगी की मांग की थी
- उत्तराखंड के नौ विधायकों ने भाजपा के 26 विधायकों के मिलकर सरकार बर्खास्तगी की मांग की थी, जो दल बदल कानून में आता है।
भाजपा से निलंबित घनसाली विधायक भीमलाल आर्य के खिलाफ दल बदल कानून के तहत कार्यवाही मंगलवार को भी पूरी नहीं हो पाई। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के सामने भाजपा के मुख्य सचेतक मदन कौशिक और भीमलाल आर्य ने अपने अधिवक्ताओं के जरिये अपना पक्ष रखा। अध्यक्ष की ओर से अब दोनों पक्षों को 28 अप्रैल को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।
भीमलाल आर्य पर भाजपा के मुख्य सचेतक मदन कौशिक ने सदन में व्हिप का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए दल बदल कानून के तहत कार्यवाही के लिए विधानसभा अध्यक्ष को याचिका दी थी। इससे पहले कांग्रेस की मुख्य सचेतक इंदिरा हृदयेश की याचिका पर विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल नौ कांग्रेस विधायकों की दल बदल कानून के तहत सदस्यता समाप्त कर चुके हैं।
भीमलाल लगातार कांग्रेस खेमे में नजर आ रहे हैं और इस कारण भाजपा सदन में बहुमत परीक्षण से पहले भीमलाल को लेकर भी आश्वस्त होना चाह रही है। मदन कौशिक मंगलवार को अपने अधिवक्ता के साथ विधानसभा में खुद भी उपस्थित हुए। विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 28 अप्रैल को दोनों पक्षों को फिर से सुनवाई के लिए बुलाया है।