स्टांप में जमीन की नहीं है मान्यता
एडवोकेट पंकज कबडवाल बताते हैं कि जमीन की रजिस्ट्री और दाखिल खारिज कराना अनिवार्य है। स्टांप में सरकारी जमीन बेचना अपराध है। इसकी कोई मान्यता नहीं है। स्टांप को निबंधन कार्यालय भी मान्यता नहीं देता है। कोई भी अनुबंध रजिस्टार कार्यालय में रजिस्टर कराया जाना अनिवार्य है।
जमीन खरीदने से पहले तहसील से करें पता
आप जमीन खरीद रहे हैं तो पहले तहसील कार्यालय से इसकी जांच करा लें। तहसील से ये पता करें कि जमीन कौन से श्रेणी में आती है। जमीन पर किसी का कब्जा तो नहीं है। जमीन बेचने वाला वह ही व्यक्ति है जिसके नाम पर जमीन की रजिस्ट्री और दाखिल खारिज है। स्टांप पर किसी भी दशा में जमीन न खरीदें। जमीन खरीदने के तुरंत बाद रजिस्ट्री कराकर उसका दाखिल खारिज करा लें। साथ ही चाहरदीवारी करा लें। महीने में दो बार अपनी जमीन देखने जरूर जाएं।
यहां भी चल रहा स्टांप पर जमीन बेचने का खेल
हल्द्वानी में दमुवाढूंगा क्षेत्र में वन भूमि स्टांप पर बेची जा रही है। हद तो यह है कि नाले तक की जमीन को लोगों ने बेच दिया है। तीन महीने पहले सिटी मजिस्ट्रेट ने दमुवाढूंगा क्षेत्र में नाले पर कब्जा कर बनाई गई घरों की बुनियाद तोड़ी थी। उस दौरान एक सत्ताधारी नेता के कहने पर सिटी मजिस्ट्रेट को यह कार्रवाई रोकनी पड़ी थी। उधर बागजाला, बिन्दुखत्ता, गौलापार सूखी नदी की ओर भी वन भूमि स्टांप पर बेची जा रही है।