बताया जाता है कि सरकारी विभाग गर्भवती महिलाओं को इसलिए नई नौकरी में ज्वाइनिंग नहीं कराते हैं क्योंकि कई बार कार्यभार ग्रहण करने के कुछ दिन बाद गर्भवती महिलाएं मातृत्व अवकाश पर चली जाती हैं। इससे विभागीय कार्य प्रभावित होते हैं। इस मामले में वादी के अधिवक्ता पारितोष डालाकोटी का कहना है कि हाईकोर्ट में यह अपनी तरह का पहला ऐसा मामला था जिसमें कोर्ट ने गर्भवती को बड़ी राहत दी। कोर्ट के आदेश के बाद वादी ने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है।
अधिवक्ता डालाकोटी का कहना है कि इससे पहले भी ऐसा हुआ है जब सरकारी विभागों ने गर्भवती महिलाओं को कार्यभार ग्रहण नहीं करने दिया या फिर कई गर्भवती महिलाएं भर्ती प्रक्रिया में ही शामिल नहीं हो सकी। इस कारण उन्हें रोजगार से वंचित रहना पड़ा लेकिन वे कोर्ट नहीं पहुंची। ऐसे में कोर्ट का यह आदेश गर्भवती महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है।