कभी बड़ी रेल लाइन के लिए हुआ था आंदोलन
ब्रिटिश शासन काल में लालकुआं से जब छोटी रेल लाइन बिछाई गई तब 1906 में भाप वाले इंजन से सीटी बजाती ट्रेन पहली बार रामनगर पहुंची तो लोगों का हुजूम ट्रेन देखने के लिए उपड़ पड़ा। रामनगर की तब आबादी महज 4038 थी। ज्यादातर काशीपुर से आने वाले व्यापारी ही यहां कारोबार करते थे। 60 के दशक में कत्थे का कारोबार चरम पर था जो ट्रेन से मुरादाबाद, बरेली, दिल्ली तक सप्लाई होता था।
1988 के दौरान काशीपुर में बड़ी रेल लाइन प्रस्तावित हुई थी लेकिन रामनगर उसमें शामिल नहीं था। इसे लेकर तीन महीने तक आंदोलन भी चला। आंदोलन के दौरान रामनगर के बाजार कई बार बंद हुए। तीन जून 1988 को तत्कालीन रेल राज्य मंत्री माधवराव सिंधिया के साथ तत्कालीन वित्त एवं वाणिज्य मंत्री नारायण दत्त तिवारी रामनगर पहुंचे और बड़ी लाइन रेल सेवा को उद्घाटन किया। इसके बाद रामनगर की जनता ने आंदोलन को समाप्त किया।