हल्द्वानी। गौलापार की क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत करने की मांग को लेकर किसान शुक्रवार को सड़क पर उतर आए। उन्होंने धरना प्रदर्शन कर दो घंटे तक हाईवे जाम कर दिया। जाम के चलते सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। किसानों के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी पहुंचे तो पुलिस प्रशासन हरकत में आया।
पूर्व बीडीसी सदस्य अर्जुन सिंह बिष्ट के नेतृत्व में किसान सुबह ही कालीचौड़ मंदिर के पास जमा हो गए। उन्होंने नारेबाजी कर जाम लगा दिया। किसानों का कहना था कि नहर में पानी न आने के कारण क्षेत्र के टमाटर की फसल सूख रही है। गेहूं की बुआई प्राभावित हो रही है। जानवरों को पीने के लिए पीने का पानी तक नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में डीएम को कई बार पत्र दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। आपदा के कारण गौलापार की करीब डेढ़ किमी की सिंचाई नहर को काफी नुकसान पहुंचा है। धरना प्रदर्शन करने वालों में ग्राम प्रधान लीला बिष्ट, उप प्रधान ललित जोशी, हरीश पलड़िया, भगवत बिष्ट, नीरज रैक्वाल, किरन डालाकोटी, विद्या लोसाली, महेंद्र बिष्ट आदि शामिल रहे।
आश्वासन के बाद माने किसान
गौलापार के किसानों की प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मिले आश्वासन के बाद किसान मान गए हैं। एसडीएम मनीष कुमार ने बताया कि गौलापार में क्षतिग्रस्त हुई नहरों को सुचारु करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। नहरों के सुधारीकरण के लिए दो करोड़ 14 लाख स्टीमेट शासन को भेजा गया है।
नहर टूटने से पांच गांव के लोग प्रभावित
गौलापार में नहरों के क्षतिग्रस्त होने से पांच गांवों के लोग प्रभावित हैं। फसलों की सिंचाई के लिए पानी का संकट खड़ा हो गया है। टमाटर, मटर, लहसुन, प्याज आदि फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।