विधानसभा परिसर में शनिवार को दिनभर कानूनविदों का जमावड़ा लगा रहा। स्पीकर ने विधायकों की ओर से जवाब दाखिल करने आए वकीलों को लौटा दिया। इसके बाद फिर सात विधायकों के आने की सूचना आई, लेकिन केवल सुबोध उनियाल ही आए। अपराह्न करीब चार बजे उनियाल के साथ आए वकीलों ने नौ विधायकों की ओर से जवाब दाखिल किया।
दोपहर करीब सवा बारह बजे एडवोकेट राजेश्वर सिंह, दीप डिमरी और हरक सिंह रावत के बड़े पुत्र अमित सिंह विधानसभा पहुंचे। इनका कहना था कि वह नौ बागी विधायकों के वकील है, लेकिन विधानसभा सचिव जगदीश चंद्र ने इस पर आपत्ति की।
स्पीकर ने मांगा अथॉरिटी लेटर
इसके बाद सचिव ने यह मामला स्पीकर के समक्ष रखा तो उन्होंने यह कहकर खारिज कर दिया कि वकील हैं तो विधायकों की तरफ से अथॉरिटी लेटर होना चाहिए। इसके बाद यह वकील वापस आ गए।
शाम को वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी, चेतन शर्मा, संजीव सेन और अमित सिंह के साथ नौ विधायकों का पक्ष रखने विधानसभा पहुंचे और उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि और समय दिया जाना चाहिए। इसी के साथ सुबोध उनियाल ने अपने भाई अधिवक्ता यूके उनियाल के साथ जाकर अपना पक्ष रखा।
समय न देने का आरोप
कानून कहता है कि पर्सनल सुनवाई का मौका मिलना चाहिए, लेकिन स्पीकर ने समय नहीं दिया। हम और बहस करना चाहते थे, लेकिन फिर भी स्पीकर ने एक नहीं सुनी। हमने अपना आधा जवाब दे दिया है, बाकी का जवाब रविवार की सुबह नौ बजे देंगे।
-दिनेश द्विवेदी, बागी विधायकों के वकील।
मेरे वकील ने स्थिति बता दी है, मामला संवैधानिकता से जुड़ा है इसलिए मैं कुछ नहीं बोलूंगा। इतना जरूर कहूंगा कि स्पीकर का काम न्याय करना है, हमें उम्मीद भी है कि वह न्याय करेंगे। लेकिन, ये वही स्पीकर हैं जो मुख्यमंत्री के साथ डांस करते हैं। ये वही स्पीकर है जो जनसभाओं में अपना सम्मान कराते रहते हैं। फिर भी देखते है क्या होता है।
-सुबोध उनियाल, कांग्रेस के बागी विधायक।