प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा कोटद्वार तहसील के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों में तैनात करीब 62 ग्राम प्रहरियों को भुगतना पड़ रहा है। ग्राम प्रहरियों को पिछले एक वर्ष से उनके मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। वह अपने अल्प मानदेय के लिए गांव से किराया-भाड़ा लगाकर कोटद्वार तहसील के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं।
कोटद्वार तहसील पहुंचे ग्राम प्रहरियों ने तहसील प्रशासन पर उन्हें मानदेय नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें मात्र 1200 रुपये मानदेय मिलता है, लेकिन पिछले एक वर्ष से वे तहसील का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें मानदेय नहीं दिया जा रहा है। बताया कि सरकार ने करीब छह माह से उनका मानदेय अब दो हजार रुपये कर दिया है, लेकिन, दो हजार तो छोड़ यहां तो 1200 रुपये के भी लाले पड़े हुए हैं। ग्राम प्रहरियों ने बताया कि उन्हें बार-बार तहसील में मानदेय देने के लिए बुलाया जाता है, लेकिन दिया नहीं जाता है। वे कोटद्वार तहसील के दूर दराज के गांव में रहते हैं। बार-बार कोटद्वार आने में उन्हें वाहन के आने जाने का किराया भरना पड़ता है। वर्ष भर से मानदेय नहीं मिलने पर उन्हें आर्थिक परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से उनका रुका हुआ मानदेय देने की मांग की है। इस मौके पर ग्राम प्रहरी चंद्रमोहन, निहाल सिंह, सत्यप्रकाश, सतीश चंद्र, गोपाल सिंह, यूनुस अली, गाविंद राम, जयवीर, राजेश भट्ट, अशोक कंडवाल, धर्मपाल, गोपाल सिंह आदि मौजूद थे। उधर, तहसीलदार विकास अवस्थी ने बताया कि जिन ग्राम प्रहरियों की राजस्व उपनिरीक्षक के माध्यम से रिपोर्ट नहीं पहुंची है, उनके चेक रोके गए हैं। जिनकी रिपोर्ट पहुंच गई है, उनके मानदेय के चेक बनाए जा रहे हैं।