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वीर चक्र विजेता शहीद बुद्धि बल्लभ बेबनी के गांव तच्छाली को सड़क निर्माण का इंतजार

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राज्य गठन के बाद पांचवां विधानसभा चुनाव भी निपट गया है। चुनाव परिणाम भी 10 मार्च को आ जाएगा। कोई जीतेगा कोई हारेगा, लेकिन दुगड्डा विकासखंड के घाड़ क्षेत्र के शहीद वीर चक्र विजेता बुद्धि बल्लभ बेबनी के पैतृक गांव तच्छाली के वाशिंदों को वर्ष 2005 में स्वीकृत सड़क के आज भी धरातल पर उतरने का इंतजार बना रहेगा।
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बीते चुनावों की तरह इस चुनावी समर में भी सभी दलों के प्रत्याशी सैनिकों और शहीदों के सम्मान का दावा करते रहे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहीद का पैतृक गांव तच्छाली अभी तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ सका है। शासन ने वर्ष 2005 में शहीद के गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए पुलिंडा-तच्छाली-स्यालिंगा मोटर मार्ग के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की थी, लेकिन 16 साल बाद भी यह सड़क धरातल पर नहीं उतर सकी है। यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले घाड़ क्षेत्र के तच्छाली, गिंठाला, स्यालिंगा, सुनार, भुनार, मुंडला, काटल, बंसतोली आदि गांवों को जोड़ने के लिए तत्कालीन राज्य सरकार ने पुलिंडा-तच्छाली-स्यालिंगा 5 किमी. मोटर मार्ग निर्माण की मंजूरी प्रदान की थी। वन विभाग का पेच फंसने के कारण तब मार्ग का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।
वर्ष 2018 में एक बार फिर से मार्ग निर्माण की कवायद शुरू हुई। लोनिवि दुगड्डा, लैंसडौंन वन प्रभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने सर्वे भी किया। लेकिन इस मार्ग से गिंठाला गांव के न जुड़ने पर गांव के 15-20 परिवारों ने पुन: सर्वे कराकर उनके गांव को भी उक्त मार्ग से जोड़ने की मांग उठाई। ग्रामीणों की मांग पर लोक निर्माण विभाग, तहसील प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने गांव पहुंचकर मार्ग का सर्वे कर समरेखण तय किया था। तब तय हुआ कि गिंठाला गांव को मार्ग से जोड़ने के लिए संपर्क मार्ग बनाया जाएगा, जिस पर ग्रामीणों ने मार्ग निर्माण को अपनी सहमति प्रदान कर दी थी।
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ग्रामीण विद्या प्रसाद बेबनी, विजय प्रसाद बेबनी, शंकर बेबनी, जितेंद्र कुमार का कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद मार्ग के निर्माण की उम्मीद जगी थी, लेकिन समरेखण के बाद विभागीय अधिकारियों के ढुलमुल रवैये के चलते अभी तक आगे की कार्रवाही नहीं हो पाई है। कहा कि एक ओर सरकार व जनप्रतिनिधि सैनिकों के सम्मान की बात कर रही है, वहीं वीर चक्र विजेता शहीद का गांव अभी तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। कहा कि सड़क सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीमार लोगों को डंडी-कंडी के जरिए मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है। कहा कि सड़क सुविधा नहीं होने से गांवों से लगातार पलायन हो रहा है।
स्वीकृत पांच किमी. लंबे उक्त मोटर मार्ग पर करीब एक किमी. वन भूमि पड़ती है। वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया गतिमान है। वन भूमि हस्तांतरित होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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- आकृति गुप्ता, सहायक अभियंता लोनिवि दुगड्डा।
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