कोटद्वार। मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर 691 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले करीब छह किमी लंबे फोरलेन बाईपास मार्ग निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि को खाली कराने की कवायद शुरू हो गई है। कोटद्वार गांव (सनेह क्षेत्र) से इसकी शुरुआत की गई। मुआवजा एवं बगैर कागजी कार्रवाई जमीन पर भवन ढहाने का पहले ही दिन विरोध हुआ। नामित मजिस्ट्रेट ने शिकायत का तत्काल प्रभाव से निस्तारण करने का आश्वासन देकर अभियान शुरू कराया।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के प्रोजेक्ट इंजीनियर अभिषेक कुमार सोमवार को कोटद्वार गांव (सनेह क्षेत्र) पहुंचे। यहां फोरलेन बाईपास मार्ग निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन पर जेसीबी लगाकर वहां बने भवन को ढहाना शुरू किया गया। जिस पर यतेंद्र चौधरी, अमित चौधरी, राकेश चौधरी ने आपत्ति जताते हुए कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि उन्हें बिना जानकारी दिए, उनकी संपत्ति पर जेसीबी चलाना अनुचित है। उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है। मुआवजे के लिए कागजात जमा करने के संबंध में पूछने पर भूस्वामियों की ओर से प्रोजेक्ट इंजीनियर को बताया गया कि औपचारिकता पूरी करने के नाम पर उन्हें काफी समय से दौड़ाया जा रहा है।
वहीं, अधिग्रहित भूमि पर एनएच खंड को कब्जा दिलाने के लिए मौके पर मौजूद नामित मजिस्ट्रेट/नायब तहसीलदार सरदार सिंह चौहान ने मंगलवार को उनके कागजात जमा कराकर मुआवजे की कार्रवाई के प्रति आश्वस्त किया। इसके बाद कब्जा हटाने का काम फिर से शुरू किया गया। इस दौरान उपनिरीक्षक हरीशचंद्र, पटवारी सीता एवं एनएच खंड के कर्मचारी मौजूद रहे।
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ये है कब्जा हटाने का दायरा
फोरलेन बाईपास मार्ग निर्माण के लिए करीब छह किलोमीटर के दायरे में 30 मीटर चौड़ाई में लोगों का स्थायी व अस्थायी कब्जा हटाते हुए भूमि अधिग्रहित की जाएगी। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए संबंधित लोगों की जानकारी के लिए दो नोटिस अखबार के माध्यम से सार्वजनिक किए जा चुके हैं।
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आबादी वाले इन क्षेत्रों में चलेगा बुलडोजर
सनेह के अलावा काशीरामपुर, जीतपुर, रतनपुर, बिशनपुर, ग्रास्टनगंज आदि क्षेत्रों में चिह्नित की गई भूमि को अधिग्रहित करने के लिए अब जल्द ही एनएचएआई की टीम बुलडोजर लेकर निकलेगी। बताया जा रहा है कि इन क्षेत्रों में लोगों ने अभी कब्जा नहीं छोड़ा है। ग्रास्टनगंज करीब 25, रतनपुर व बिशनपुर में 40-40 भवन हटाए जाने हैं।
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फोरलेन बाईपास मार्ग निर्माण शुरू करने से पहले 80 फीसदी जमीन खाली चाहिए होती है। लोगों द्वारा स्वयं कब्जा नहीं छोड़ने पर बुलडोजर लेकर निकलना पड़ा। जल्दी ही अन्य क्षेत्रों में पहुंचकर चिह्नित भूमि खाली कराई जाएगी।
- अभिषेक कुमार, प्रोजेक्ट इंजीनियर, एनएचएआई नजीबाबाद