आठ सूत्री मांगों के समर्थन में दुगड्डा ब्लाक की भोजन माताओं ने तहसील में प्रदर्शन किया। साथ ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर उनकी मांग पर शासनादेश जारी करने की मांग की।
सोमवार को दुगड्डा ब्लाक अध्यक्ष अनिता शर्मा के नेतृत्व में भोजन माताएं हिंदू पंचायती धर्मशाला में एकत्र हुईं और उन्होंने उत्तराखंड भोजन माता कामगार यूनियन के बैनर तले तहसील में प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान आयोजित सभा में भोजन माताओं ने कहा कि गत कई वर्षों से आठ सूत्री मांग को लेकर आंदोलन कर रहीं हैं, लेकिन प्रदेश सरकार उनकी ओर आंखें मूंदी हुई है। भोजनमाताएं स्कूलों में खाना बनाने से लेकर सफाई आदि का पूरा काम करती हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें बहुत कम मानदेय दिया जाता है। कम मानदेय में परिवार का पालन-पोषण व बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। कई भोजनमाताएं 14-15 साल से अधिक समय से काम कर रही हैं, लेकिन छात्र संख्या कम होने के कारण अब उन्हें निकाला जा रहा है। कहा कि सरकार ने गत जुलाई को भोजन माताओं का मानदेय पांच हजार रुपये करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक इसका शासनादेश जारी नहीं किया। इस दौरान यूनियन की दुगड्डा ब्लाक सचिव सीता देवी, कमला देवी, आशा जखमोला, मंजूू देवी, प्रभा गुसाईं, शाकांबरी रावत, मालती देवी, जमोत्री नेेगी, सुधा भदोला, मीना रावत, निर्माला बौंठियाल और पर्वती देवी आदि मौजूद थे।
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यह हैं भोजन माताओं की मांगें
उत्तराखंड भोजन माता कामगार यूनियन ने सीएम से श्रम सम्मेलन में पारित प्रस्तावों के अनुसार उन्हें कामगार घोषित करने, भविष्य निधि बीमा की सुविधा देने, विद्यालयों का निजीकरण नहीं करने, भोजन माताओं को विद्यालय से नहीं निकालने, मध्याह्न भोजन व्यवस्था निजी हाथों में नहीं देने, विद्यालय में भोजन माताओं से खाना बनवाने, सेवानिवृत्ति पर एक लाख रुपये देने और वृद्धा पेंशन का लाभ देने की मांग की।