आपदा के 111वें दिन भले ही बाबा केदारनाथ की यात्रा पुन: शुरू हो गई है, पर केदारघाटी में जनजीवन अब भी रेंग कर आगे बढ़ रहा है। बीआरओ और लोनिवि ने सड़कों को खोलने का काम जरूर किया है। बिजली, पानी और संचार जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए लोग भटक रहे हैं।
गुप्तकाशी सहित केदारघाटी के गांवों में घंटों बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या जस की तस बनी हुई है। संचार सेवा दम तोड़ रही है। ऐसे में शनिवार पांच अक्तूबर से केदारनाथ की पुन: यात्रा शुरू कराने को लेकर कई सवाल लोगों के मन में हैं।
तैयारियों पर सवाल उठा रहे लोग
केदारघाटी विस्थापन एवं पुनर्वास संघर्ष समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कहना है कि सरकार यात्रा शुरू कराकर क्या साबित करना चाह रही है, समझ से परे है। हालात अब भी जून जैसे ही हैं। फर्क इतना है कि मुख्य मार्ग पर वाहन दौड़ तो रहे हैं लेकिन सड़क की स्थिति भी कई स्थानों पर नाजुक बनी है।
रुद्रप्रयाग निवासी अशोक नौटियाल कहते हैं कि अब भी हालात सुधरे नहीं है। सुविधाओं की बहाली के सरकारी दावे हवाई साबित हुए है। सरकार के अपने ही लोग तैयारियों पर सवाल उठा रहे हैं, ऐसे में स्थिति का स्वयं अंदाजा लगाया जा सकता है।
चंद्रापुरी बाजार निवासी बृजमोहन बिष्ट का कहना है कि आपदा के पौने चार माह बाद भी प्रभावितों की सुध नहीं ली जा रही है। विस्थापन प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। गुप्तकाशी के महेश सेमवाल का कहना है कि जरूरी सुविधाएं आज भी बहाल नहीं हुई है।