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Uniform Civil Code: उत्तराखंड के सीएम धामी को सिब्बल की खरी-खरी, कहा- आप अपनी पार्टी को शर्मिंदा ना करें

Sat, 12 Feb 2022 04:10 PM IST
रोमा रागिनी न्यूज डेस्क अमर उजाला, उत्तराखंड

सार

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समान आचार संहिता लागू करने के वादे पर कपिल सिब्बल ने खरी-खरी सुनाई है। सिब्बल ने कहा कि इससे पता चल रहा है कि बीजेपी उत्तराखंड में चुनाव हार रही है। 
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कपिल सिब्बल ने धामी को दी नसीहत - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर जुबानी हमला बोला है। सिब्बल ने धामी के समान नागरिक संहिता लागू करने के वादे पर कहा कि ये बताता है कि बीजेपी उत्तराखंड में चुनाव हार रही है। उन्हें कानूनी सलाह की जरुरत है। 
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन एक वीडियो जारी किया था। उसमें उन्होंने कहा कि अगर राज्य में बीजेपी जीतती है तो वो समान आचार संहिता का ड्राफ्ट बनाने के लिए समिति बनाएंगे। इस समिति की पैनल में कानून के एक्सपर्ट, सेवानिवृत लोग और स्टॉकहोल्डर शामिल किए जाएंगे। 

उनके इसी बयान पर सिब्बल ने ट्वीट कर लिखा कि 'बीजेपी के जीतने पर समान आचार संहिता लागू करने की घोषणा करके पुष्कर सिंह धामी, कृपया आप अपनी पार्टी और खुद को शर्मिंदा ना करे। इससे पता चलता है कि उत्तराखंड में आपकी पार्टी हार रही है और आपको कानूनी सलाह की जरुरत है।'
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पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि आगामी नई भाजपा सरकार अपने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद न्यायविदों, सेवानिवृत जनों, समजा के प्रबुद्धजनों की एक कमेटी तैयार करेगी, जो यूनिफॉर्म सिविल कोड का ड्राफ्ट तैयार करेगी। यूनिफॉर्म सिविल कोड संविधान निर्माताओं के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक प्रभावी कदम होगा। उत्तराखंड में जल्द यूनिफॉर्म सिविल कोड जारी किया जाएगा। बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा की 70 सीटों पर 14 फरवरी को मतदान है। 

समान नागरिक संहिता पर बंटे संविधान विशेषज्ञ
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को कहा था कि अगर भाजपा राज्य में दोबारा चुनी जाती है तो पार्टी समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए एक पैनल गठित करेगी। हालांकि, विशेषज्ञ इस मुद्दे पर बंटे हुए हैं कि क्या किसी राज्य के पास समान नागरिक संहिता पर कानून लाने की शक्ति है।

संविधान विशेषज्ञ एवं लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचारी ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों को इस तरह का कानून लाने का अधिकार है, क्योंकि शादी, तलाक, विरासत और संपत्ति पर अधिकार जैसे मुद्दे संविधान की समवर्ती सूची में आते हैं। लेकिन, पूर्व केंद्रीय कानून सचिव पीके मल्होत्रा का मानना है कि केंद्र सरकार ही संसद के रास्ते ऐसा कानून ला सकती है। आचारी के मुताबिक, राज्य विधानसभा संबंधित राज्य में रहने वाले समुदाय के लिए कानून बना सकती है। उन्होंने कहा, ‘इसका मतलब है कि स्थानीय विविधताओं को राज्य सरकार द्वारा बनाए गए कानून के जरिये मान्यता दी जा सकती है।

आचार्य के अनुसार, पर्सनल लॉ-विवाह, तलाक, विरासत और संपत्ति के अधिकार से जुड़े कानून-एक समान नागरिक संहिता के दायरे में आते हैं। लेकिन, मल्होत्रा की राय थी कि चूंकि संविधान का अनुच्छेद-44 पूरे भारत में सभी नागरिकों को संदर्भित करता है, तो केवल संसद ही ऐसा कानून बनाने के लिए सक्षम है।

गोवा में समान नागरिक संहिता होने से जुड़े सवाल पर मल्होत्रा ने कहा कि उनकी समझ के अनुसार, गोवा के भारत का हिस्सा बनने से पहले से ही यह कानून अस्तित्व में था। संविधान के अनुच्छेद-44 में यह प्रावधान है कि राज्य भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा।
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