प्रदेश में अब परिवार नियोजन के परंपरागत उपायों के साथ ही इंजेक्शन भी इस्तेमाल किए जाएंगे। एक बार इंजेक्शन लगाने के बाद अगले तीन माह तक गर्भधारण की चिंता नहीं रहेगी। खास बात यह है कि यह गर्भनिरोधक गोलियों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित भी होगा। प्रदेश में इनका इस्तेमाल करने को लेकर कवायद शुरू हो गई है।
प्रदेश के सरकारी चिकित्सकों में अभी तक परिवार नियोजन के परंपरागत उपाय अपनाए जाते रहे हैं। अस्पतालों में लोगों को निशुल्क कंडोम, कॉपर टी और गर्भ निरोधक गोलियां वितरित की जाती है। अब स्वास्थ्य विभाग नई तकनीक को अपनाने जा रहा है।
डिलिवरी के डेढ़ माह बाद भी कर सकते है इसका प्रयोग
इसके तहत प्रत्येक तीन माह में लगने वाले डेपो मेड्रोक्सी प्रोगेस्ट्रोन एसीटेड (डीएमपीए) इंजेक्शन प्रयोग किए जाएंगे। महिलाओं को लगने वाले इन इंजेक्शनों का असर तीन माह तक रहता है। खास बात यह है कि डिलिवरी के डेढ़ माह बाद भी इसका प्रयोग सुरक्षित है।
इसके अलावा प्रोजेस्ट्रान ऑनली पिल्स और सेंट क्रोमेन नॉन हॉर्मोनल का भी इस्तेमाल किया जाएगा। सेंट क्रोमेन नॉन हॉर्मोनल होती है। ऐसे में इसका लंबे समय तक इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि यह सभी उपाय महंगे होने के चलते अभी तक सरकारी सिस्टम में उपयोग नहीं होते थे।
परिवार नियोजन के लिए इंजेक्शन समेत अन्य विकल्पों को लागू करने की कवायद चल रही है। इसको लेकर कार्यशाला व अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बाद सरकारी अस्पतालों में यह उपाय लागू किए जाएंगे।
डा. कुसुम नरियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक