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ट्यूशन फीस भी बढ़ाई, अब तो हद हो गई भाई

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दो साल के कोरोना संक्रमण काल के बाद शुरू हुए शिक्षा सत्र में निजी स्कूलों की ओर ट्यूशन फीस में 30 फीसदी की बढ़ोतरी से अभिभावकों के घर का बजट डगमगा गया है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि घर कैसे चलाएं और बच्चों को कैसे पढ़ाएं। अभिभावकों का कहना है कि पंजाब सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की तरह उत्तराखंड में भी स्कूलों की फीस वृद्धि पर लगाम लगानी चाहिए।
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कोरोना संक्रमण के चलते ऑफलाइन पढ़ाई नहीं होने से स्कूलों पर दो साल से ताले लटके रहे और बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई करते रहे। इधर, लॉकडाउन की वजह से व्यापार, नौकरी से लेकर मजदूरी तक करने वालों की आमदनी सीमित हो गई तो कई लोगों की कमाई बंद तक हो गई। लोगों के सामने खाने-पीने का संकट भी खड़ा हो गया था। दो साल बाद संक्रमण के मामलों में राहत मिलने से जीवन सामान्य हुआ और स्कूल, कॉलेज भी खुल गए। लेकिन, निजी स्कूलों ने ट्यूशन फीस के नाम पर मनमानी शुरू कर दी है। स्थिति यह है कि 20 से 30 प्रतिशत तक ट्यूशन फीस के नाम पर स्कूल फीस बढ़ा दी गई है। स्कूलों ने अप्रैल से यह बढ़ा हुआ शुल्क अभिभावक से भरने के लिए कहा है। स्कूलों की ओर से इसके लिए दबाव भी बनाया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन का यहां तक कहना है कि बच्चे पढ़ाने हैं तो शिक्षा शुल्क भरना होगा, वरना नाम कटवा लें।
बोले अभिभावक
स्कूलों की ओर से मनमर्जी ट्यूशन फीस बढ़ाई जा रही है। इन पर किसी को कोई नियंत्रण नहीं चल रहा है। जिससे बच्चों को अच्छी शिक्षा देना मुश्किल हो गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ट्यूशन फीस वसूली पर अंकुश लगना चाहिए।
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ब्रजमोहन, सुभाषनगर
कोरोना कॉल में भी स्कूलों की ओर से फीस नहीं छोड़ी गई। आर्थिक हालत अत्यधिक खराब होने के बावजूद पूरी फीस वसूली गई है। अब स्कूलों की ओर से मनमाफिक फीस बढ़ाकर उन पर सीधा-सीधा अत्याचार किया जा रहा है।
नीता, रोशनाबाद
सरकार की ओर से नियम-कानून तो खूब बनाए जा रहे हैं। पर इनका धरातल पर पालन कराने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। तभी तो जो मर्जी आ रहा है निजी स्कूल संचालक फीस वसूल कर अभिभावकों की कमर तोड़ रहे हैं।
बसंती, रामधाम
बच्चों के नए सत्र में प्रवेश होते ही स्कूलों की ओर से ट्यूशन फीस से लेकर अन्य शुल्कों में भारी बढ़ोत्तरी कर दी गई है। जिससे उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि बच्चों को अच्छे स्कूलों में कैसे पढ़ाएं। निजी स्कूलों के लिए फीस को लेकर गाइड लाइन जारी होनी चाहिए।
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सत्यवीर, भेल
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