बदलते समय में बच्चों का दिमाग भी तेजी से बदल रहा है। अब हालात ये हो गए हैं कि बच्चे माता-पिता की डांट भी बरदाश्त नहीं कर रहे हैं। किसी बात पर अगर माता-पिता डांट दें तो घर तक छोड़ दे रहे हैं। एक साल के अंदर चाइल्ड लाइन 245 से ज्यादा बच्चों को उनके माता-पिता से मिलवा चुका है। चाइल्ड लाइन की काउंसिलिंग में इन बच्चों के डांट से नाराज होकर घर छोड़ने की बात सामने आई। इन बच्चों की उम्र 12 से 15 साल है।
अक्सर रेलवे स्टेशन और बस अड्डे के साथ ही कई सार्वजनिक स्थानों पर बच्चें भटकते हुए मिलते है। डरे, सहमे हुए और अकेले बच्चों पर सिटी और रेलवे चाइल्ड लाइन भी निगाह रखने के लिए जुटी रहती है। संदेह होने पर बच्चों की काउंसिलिंग की जाती है। जिसमें बच्चों की चौकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। मनपसंद चीज न मिलना, छोटी-छोटी बातों पर जिद करने पर माता-पिता डांट दें तो नाराज होकर घर छोड़ने की बात सामने आ रही है।
एक साल के अंदर सिटी चाइल्ड लाइन ने 245 से ज्यादा बच्चों को परिजनों से मिलवाया है। इनमें अधिकांश बच्चे हरिद्वार जनपद के अलावा उत्तर प्रदेश के आसपास के जिलों से घर छोड़कर हरिद्वार पहुंचे। जबकि कुछ बिछुड़कर पहुंचे। 12 से 15 साल के इन बच्चों की जब काउंसिलिंग हुई तो अधिकांश बच्चों का परिजनों की डांट से नाराज होकर घर छोड़ना सामने आया।
चाइल्ड लाइन की टीम लगातार ऐसे बच्चों पर निगाह रखती है जो अकेले और सहमे हुए दिखते हैं। इन बच्चों की काउंसिलिंग की जाती है। काउंसिलिंग में अधिकांश बच्चे माता-पिता के डांटने से नाराज होकर घर छोड़ने की बात बताते हैं। परिजनों को भी बदलते समय के साथ बच्चों के साथ व्यवहार में बदलाव करना जरूरी है।
- अनुज सिंह, केंद्र समन्वयक, सिटी चाइल्ड लाइन हरिद्वार