मेला अस्पताल में लगा ऑक्सीजन प्लांट।
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मेला अस्पताल में तो ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट को तैयार हो गया है लेकिन अभी लालढांग में ऑक्सीजन प्लांट के शुरू होने के लिए इंतजार करना होगा। कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार के बीच ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी तो लालढांग क्षेत्र के लोगों को जूझना पड़ेगा।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में ऑक्सीजन का भारी संकट हुआ। कोरोना के गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिलने से उनकी मौतें हुईं। सामाजिक संगठनों और लोगों ने ऑक्सीजन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए अभियान चलाए। स्थिति गंभीर होने पर भेल प्रशासन ने एक प्लांट को अस्पतालों में ऑक्सीजन की पूर्ति के लिए चालू किया। इससे उत्तराखंड के साथ ही दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल समेत कई राज्यों से ऑक्सीजन के सिलिंडरों की आपूर्ति हुई।
अस्पतालों में बेड से ज्यादा संकट मरीजों के लिए ऑक्सीजन का रहा। इस किल्लत को देखते हुए मेला अस्पताल में सांसद निधि से करीब एक हजार एमएलडी का ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कवायद शुरू हुई थी जो अब पूरी हो चुकी है। मेला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट तैैयार हो गया है। इससे पाइप के माध्यम से सात जनवरी को बेड पर ऑक्सीजन पहुंचाने का ट्रायल भी सफल हो गया है। इससे 60 बेड के मेला अस्पताल में ऑक्सीजन की समस्या दूर हो गई है।
वहीं लालढांग के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बनाया जा रहा ऑक्सीजन प्लांट अब तक तैयार नहीं हुआ है जबकि यहां महीनों से प्लांट को शुरू करने का काम किया जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. किशन सिंह चौहान का कहना है कि प्लांट में कुछ काम रह गया है। इसे शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा। उम्मीद है कि जनवरी में ही ऑक्सीजन प्लांट को शुरू कर दिया जाएगा।
नहीं भरे जा सकेंगे सिलिंडर
मेला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट तो तैयार है लेकिन उसमें बूस्टर यूनिट नहीं लगाई गई है। इससे अस्पताल प्रशासन को मिले करीब ढाई सौ सिलिंडरों को बाहर से ही भरवाना पड़ेगा। सीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता का कहना है कि ऑक्सीजन प्लांट केवल मेला अस्पताल के लिए बना है। ऑक्सीजन सिलिंडर तो आपातकालीन स्थिति के लिए हैं ताकि यदि कभी प्लांट में कुछ गड़बड़ी हो तो सिलिंडरों को बाहर से भरवाकर प्रयोग किया जा सके।