मतदान के एक दिन बाद अधिकांश सरकारी कार्यालयों में एकदम सन्नाटा पसरा रहा। कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारी ही नहीं फरियादी भी नहीं पहुंचे।
मालूम हो कि एक महीने पहले से ही विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई थी। करीब एक पखवाड़े पहले से पूरी सरकारी मशीनरी चुनाव की तैयारियों में जुट गई थी। अधिकांश सरकारी कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी तय कर दी थी। अधिकारी पहले से ही चुनाव में व्यस्त हो गए थे। चुनाव प्रशिक्षण के बाद कर्मचारी भी व्यस्त हो गए। ऐसे में सरकारी कार्यालयों में आम लोगों के काम नहीं हो रहे थे। फरियादी तहसील सहित विकास भवन के कार्यालयों में पहुंचे थे, लेकिन मायूस होकर लौट जाते। सोमवार को मतदान था। एक दिन पहले ही कर्मचारियों को मतदान केंद्रों पर भेज दिया गया था। लगातार दो दिन की भागदौड़ के बाद मंगलवार को अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यालयों में नहीं पहुंचे। अधिकांश ने चुनावी थकान मिटाई।
विकास भवन से लेकर कलक्ट्रेट, तहसील मुख्यालय, नगर निगम कार्यालय, जिला खाद्य आपूर्ति कार्यालय, हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण, बहादराबाद खंड विकास मुख्यालय आदि सन्नाटा जैसा पसरा पड़ा रहा। आम लोगों को भी इस बात का अंदाज था कि मंगलवार को कार्यालयों में कोई नहीं मिलेगा। इसलिए लोग भी अपनी फरियाद लेकर नहीं पहुंचे।