श्री लोकेश धाम में ब्रह्मलीन जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लोकेशानंद गिरी की 23वीं
- फोटो : HARIDWAR
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा है कि धर्म के संरक्षण में संतों ने सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। महापुरुषों का जीवन सदैव ही समाज हित में समर्पित रहता है।
कनखल स्थित श्री लोकेश धाम में ब्रह्मलीन जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लोकेशानंद गिरि की 23वीं पुण्य तिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि भारत की महान विभूति ब्रह्मलीन स्वामी लोकेशानंद गिरि एक विद्वान एवं तपस्वी संत थे। जिन्होंने अपने कुशल व्यवहार एवं आचरण के माध्यम से समाज को धर्म का सकारात्मक संदेश प्रदान किया और युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाकर धर्म के प्रति जागृत किया।
इस अवसर पर सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरुषों के सानिध्य में ब्रह्मलीन स्वामी लोकेशानंद गिरि के शिष्य स्वामी सदाशिवानंद गिरि को तिलक चादर भेंट कर महंताई प्रदान की गई और लोकेश धाम का उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि महापुरुष केवल शरीर त्यागते हैं। उनकी शिक्षाएं सदैव समाज को जागृत कर मार्गदर्शन करती हैं। महामंडलेश्वर स्वामी शिवानंद एवं श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के कोठारी महंत दामोदर दास ने कहा कि योग्य गुरु को ही सुयोग्य शिष्य की प्राप्ति होती है। इस मौके पर युवा भारत साधु समाज के महामंत्री स्वामी रविदेव शास्त्री, महामंडलेश्वर स्वामी भगवत स्वरूप, महामण्डलेश्वर स्वामी कपिल मुनि, महंत दुर्गादास, युवा भारत साधु समाज स्वामी रवि देव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी गिरधर गिरि, स्वामी दर्शनानन्द गिरि आदि मौजूद रहे।