गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्रियों के मुद्दे को उठाने वाले प्रोफेसर पर गाज गिर गई। उन्हें विवि प्रशासन ने अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया है। उधर, सस्पेंड प्रोफेसर का कहना है कि उन पर बदले की भावना से कार्रवाई की गई है।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रूप किशोर शास्त्री ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंग्रेजी के प्रो. श्रवण कुमार शर्मा को निलंबित किया गया है। इससे पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। संतोषजनक जवाब नहीं देने पर अनुशासनहीनता और अन्य विभिन्न आरोपों में निलंबित कर जांच बैठा दी गई है। उन्होंने बताया कि आंतरिक गुणवत्ता और आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. आरसी दुबे ने नैक टीम के विवि के निरीक्षण को लेकर 18 अक्तूबर हुई बैठक में श्रवण कुमार शर्मा का प्रो. सत्यदेव निगमालंकर और अन्य शिक्षकों से विवाद हो गया था। अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा था। आरोप है कि श्रवण कुमार शर्मा प्रो. सत्यदेव निगमालंकार को मारने के लिए झपट पड़े और मारने की धमकी दे डाली। बैठक से बाहर जाने के लिए कहने पर शर्मा ने कुलपति को ही बाहर जाने के लिए कह दिया था।
कुलपति ने बताया कि मई 1995 में भी डा. श्रवण कुमार शर्मा को सीनेट का घेराव करने और सदस्यों के साथ अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किया जा चुका है। किंतु इतना होने का बावजूद उनमें कोई सुधार नहीं हो रहा है। इन्हीं हरकतों की वजह से उन्हें फिर से निलंबित करना पड़ रहा है। उधर, सस्पेंड प्रो. श्रवण कुमार शर्मा का कहना है कि बैठक में उन्होंने फर्जी डिग्रियों की चल रही जांच और शिक्षकों के हितों के मुद्दे उठाए थे। जिसके कारण उन्हें बदले की भावना के तहत निलंबित किया गया है। उनके ऊपर लगे सभी आरोप निराधार हैं।