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अरबों की संपत्तियों पर कब्जा, निगम बेखबर

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नगर निगम की देवपुरा स्थित भू-संपत्तियों की लीज सालों पहले खत्म हो गई है। 2014 अक्तूबर में बोर्ड बैठक में संपत्तियों को खाली कराने का निर्णय हुआ था। इसके बाद निगम की ओर से 28 फरवरी 2015 तक सर्किल रेट के हिसाब से क्षतिपूर्ति धनराशि वसूलने के लिए नोटिस भी जारी किए गए लेकिन आज तक संपत्ति लीज नवीनीकरण या कब्जा खाली कराने को लेकर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई।
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नगर निगम की देवपुरा के आसपास कई संपत्तियां हैं। इन्हें एक अप्रैल 1923 को लीज पर दिया गया था। इसमें रेलवे के मालगोदाम के सामने की संपत्ति को एक अगस्त 1960 को मेसर्स वर्मा सेल्स कॉरपोरेशन देहली को लीज पर दिया गया था। इसकी लीज 31 जुलाई 1990 में खत्म हो गई है जबकि प्लाट संख्या आठ, नौ, 10, 15, 16 की लीज 31 मार्च 2013 को खत्म हो गई। संपत्तियों को निगम प्रशासन अपने कब्जे में नहीं ले पाया। इतना ही नहीं सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा भी नहीं वसूला गया।
वर्ष 2017 जून माह में लेखा परीक्षा में जांच के दौरान अधिकारियों के सामने आया था कि 2014 अक्तूबर में हुई नगर निगम की बोर्ड बैठक में भू-संपत्तियों को खाली कराने के साथ ही मुआवजा सर्किल रेट से वसूलने का फैसला हुआ था। लीज समाप्त होने से 28 फरवरी 2015 तक संपत्तियों पर सर्किल रेट से क्षतिपूर्ति धनराशि वसूल करने के लिए कब्जाधारियों को वर्ष मार्च 2015 में नोटिस भी जारी हुए थे लेकिन, लीज समाप्ति पर शासन से दिशा-निर्देश लेकर बोर्ड निर्णय से लीज नवीनीकरण या संपत्ति की बेदखली की कार्रवाई आज तक नहीं हो पाई।
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- पूर्व में जिन संपत्तियों की लीज खत्म हुई थी उन्हें नोटिस दिए गए थे। कुछ का मामला कोर्ट में भी विचाराधीन है। जिन पर कार्रवाई के लिए कोर्ट के आदेश का इंतजार किया जा रहा है। - दयानंद सरस्वती, नगर आयुक्त हरिद्वार
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