जिले की तीन पंचायतें बृहस्पतिवार से पूरी तरह से राम भरोसे हो जाएंगी। ग्राम व जिला पंचायत में तैनात प्रशासकों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। क्षेत्र पंचायतों में तैनात प्रशासक भी नौ जून को कुर्सी छोड़ देंगे।
28 मार्च 2020 को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया था। तब से लेकर अब तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नहीं कराए गए हैं। कभी परिसीमन तो कभी नई नगर पंचायतों और कोरोना काल के कारण पंचायत चुनाव की प्रक्रिया स्थगित होती रही है। इस दौरान दो बार पंचायतों में बतौर प्रशासक एडीओ पंचायत भी तैनात किए गए लेकिन तीसरी बार राज्यपाल की ओर से प्रशासकों को बैठाने की अनुमति नहीं दी गई है। इससे सवा दो महीने से ग्राम पंचायतों में न तो प्रधान हैं और न ही प्रशासक हैं। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
जिला पंचायत में भी बतौर प्रशासक तैनात जिलाधिकारी विनय शंकर पांडे का कार्यकाल 17 मई को समाप्त हो चुका है। इससे जिला पंचायत का हाल भी ग्राम पंचायतों जैसा चल रहा है। अब नौ जून को छह क्षेत्र पंचायतों में प्रशासक के रूप में तैनात एसडीएम का कार्यकाल भी पूरा हो जाएगा। इससे भगवानपुर, रुड़की, नारसन, खानपुर, लक्सर और बहादराबाद में ब्लॉक प्रमुख और प्रशासक तैनात नहीं होने से विकास की गाड़ी रुक जाएगी।
जिला पंचायत में बतौर प्रशासक नियुक्त जिलाधिकारी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में जब तक प्रशासक की नियुक्ति नहीं होगी, तब तक कोई भी विकास कार्य नहीं हो सकेगा। - महेश कुमार, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, हरिद्वार
कांवड़ के लिए सरकार से लेंगे बजट
कांवड़ मेले में कांवड़ पटरी मार्ग पर जिला पंचायत की ओर से शौचालय और साफ-सफाई का कार्य कराया जाता है। इसके लिए जिला पंचायत की ओर से बजट खर्च किया जाता है। इस बार बोर्ड और प्रशासक न होने से जिला पंचायत का पैसा कांवड़ मेले के लिए नहीं निकल पाएगा। इस कारण जिला पंचायत की ओर से सीधे सरकार से बजट देकर कार्य कराने की मांग की जाएगी।