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घाटों पर अब प्लास्टिक नहीं, हाथ से निर्मित चटाई बिकेंगी

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गंगा को प्रदूषित होने से बचाने और गंगा घाटों पर प्लास्टिक कैन और चटाई से मुक्त करने के लिए नगर निगम ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। नगर निगम के सहयोग से महिला सहायता समूह गंगा घाटों पर प्लास्टिक की कैन की जगह बांस, तांबा और कांच की बोतलें बेंचेंगे। इसके अलावा घाटों पर श्रद्धालुओं की ओर से बैठने के लिए प्रयुक्त की जाने वाली प्लास्टिक की चटाई की जगह कपड़े व जूट की चटाई किराये पर उपलब्ध कराई जाएंगी। जिला प्रशासन से अनुमति मिलते ही शुरूआत में कुछ घाटों पर यह काम शुरू किया जाएगा।
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मंगलवार को नगर आयुक्त दयानंद सरस्वती ने सीसीआर भवन में दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत गठित महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ बैठक की। बैठक के बाद नगर आयुक्त ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों की ओर से गंगा घाटों पर स्टॉल लगाकर प्लास्टिक के कैन के बजाय पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में बांस, तांबा और कांच की बोतल की बिक्री और प्लास्टिक के स्थान पर हाथ से निर्मित कपड़े या जूट की चटाई किराये पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह में सभी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सैंपल प्रस्तुत करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के अनुमोदन प्राप्त होने के बाद फिलहाल मालवीय दीप घाट, कांगड़ा घाट, रोड़ी बेलवाला, ऊषा घाट, प्रेमनगर आश्रम घाट, अमरापुर घाट, शीतला माता, सीसीआर पुल पर 25 अप्रैल से विभिन्न स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ये कार्य शुरू करेंगी। इससे प्लास्टिक का उपयोग तो कम होगा ही साथ स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आजीविका भी बढे़गी। बैठक में सिटी मिशन प्रबंधक अंकित रमोला, रजनी बिष्ट, सोनिया गुप्ता, शाहीन आदि मौजूद रहे।
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