उत्तराखंड पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों का चालान करने के लिए ‘ट्रैफिक आई’ एप लांच किया है। पुलिस अब इसी एप ने वाहनों का चालान कर रही है। चालान करने के दौरान कई चोरी के वाहन भी पकड़े जा रहे हैं। दरअसल, चालान होते ही मैसेज गाड़ी के स्वामी तक पहुंच जाता है। इससे चोरी की गाड़ियां पकड़ने में पुलिस को बड़ी मदद मिल रही है। हरिद्वार पुलिस ने अब तक चार से अधिक मामले इस तरह से पकड़े हैं।
एप के जरिये भी यातायात नियमों की अनदेेखी करने वाले लोगों पर अब आम शहरी भी शिकंजा कर रहे हैं। लोग अब बेतरतीब खड़े वाहन, बिना हेलमेट बाइक चालन वालों की फोटो और वीडियो इस एप पर अपलोड कर रहे हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन चालान भी पुलिस के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। इसके माध्यम से चोरी की वाहन भी पकड़े जा रहे हैं। संवाद
ऐसे करता है काम एप
हरिद्वार। उत्तराखंड ट्रैफिक आई एप को अपने फोन में प्ले स्टोर से डाउनलोड करें। इसके बाद उसमें अपना नाम, पता व अन्य जरूरी जानकारी भरें। जानकारी भरने के बाद कुछ ऑप्शन आएंगे। उदाहरण के तौर पर यदि कोई कार सड़क पर खड़ी है और वहां पर जाम लग रहा है तो आपको कार का फोटो खींचकर एप पर अपलोड करना होगा। इसके बाद यातायात पुलिस के कंट्रोल रूम में कार की जानकारी पहुंचेगी और वहां से बैठे-बैठे ही अधिकारी कार चालान कर देंगे। इसके अलावा रेस ड्राइविंग, बिना हेलमेट वाहन चलाने, ट्रिपल राइडिंग के फोटो व वीडियो इस एप पर अपलोड किए जा सकते हैं।
केस एक--
सिडकुल के पेंटागन मॉल के पास एक कार सड़क पर खड़ी थी। उधर से गुजर रहे राहगीर ने कार का फोटो खींचकर उत्तराखंड ट्रैफिक आई एप पर अपलोड किया। इसके बाद पुलिस ने कार का चालान किया। कार के मालिक के पास जब चालान का मैसेज पहुंचा तो वह हरिद्वार पहुंचा और बताया कि उसकी कार गुरुग्राम से चोरी हुई थी।
केस दो--
मंगलौर में सीपीयू के जवानों ने पुराने मॉडल की बुलेट का चालान किया। जिसके बाद बुलेट के असली मालिक के मोबाइल पर मैसेज गया। मैसेज मिलने के बाद मालिक ने पुलिस ने संपर्क कर बताया कि उसकी बुलेट चोरी हो गई थी। पुराना मॉडल होने के बाद कारण उसने मुकदमा दर्ज नहीं कराया था।
ट्रैफिक आई एप पर ई-पॉश मशीन से चालान होने के बाद चोरी की कई गाड़ियां मिली हैं। इन गाड़ियों के असली मालिकों के पास मैसेज पहुंचा तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
- मनोज कात्याल, एसपी यातायात व अपराध, हरिद्वार।